शीत युद्ध की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। गहरे समुद्र से आ रही खबरें दुनिया को दहला देने वाली हैं। अमेरिका और रूस के बीच तनाव उस चरम पर पहुंच गया है, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक ‘दावानल’ का रूप ले सकती है। वेनेजुएला के तेल को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच सैन्य शक्ति प्रदर्शन में बदल चुका है।

जहां अमेरिकी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वेनेजुएला से जुड़े एक विशाल तेल टैंकर को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। वाशिंगटन का दावा है कि यह टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था और इसके जरिए होने वाली कमाई का इस्तेमाल ‘अवैध गतिविधियों’ के लिए किया जाना था। तो वहीं क्रेमलिन ने इस अमेरिकी कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है। लेकिन रूस केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा। चंद घंटों के भीतर मास्को ने अटलांटिक महासागर में अपने सबसे घातक हथियारों की तैनाती कर दी है। आपको बताते चलें कि रूस के अत्याधुनिक मिसाइल विध्वंसक (Destroyers) टैंकर के रास्ते की ओर बढ़ रहे हैं। और यदि रिपोर्टों की माने तो, रूस ने अपनी एक घातक पनडुब्बी को गुप्त मिशन पर रवाना किया है, जिससे अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) में हड़कंप मच गया है।
बहरहाल जो भी हो लेकिन इस घटना का सबसे भयानक असर दुनिया की जेब पर पड़ता दिख रहा है। जैसे ही समुद्र में इस सैन्य जमावड़े की खबर फैली, वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) में भूचाल आ गया। तो वहीं कच्चे तेल की कीमतों में पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड तेजी देखी गई है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। और यदि यह तनाव बढ़ता है और सप्लाई चेन बाधित होती है, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

फिलहाल आपको बताते चलें कि अब दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ एक गलत फैसला करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है। एक तरफ आर्थिक प्रतिबंधों की ढाल है, तो दूसरी तरफ गरजते हुए युद्धपोतों की तलवार। फिलहाल, पूरी दुनिया सांसें थामकर समुद्र से आने वाली अगली खबर का इंतजार कर रही है।









