पिछले कुछ हफ्तों से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों के बीच अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह अलग-थलग करने से ही वहां की सत्ता पर लगाम कसी जा सकती है। इसी रणनीति के तहत, ट्रंप प्रशासन ने अब उन देशों को निशाना बनाया है जो अभी भी ईरान के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए हुए हैं। भारत, जो ईरान के शीर्ष पांच व्यापारिक साझेदारों में शामिल है, अब इस ‘टैरिफ वॉर’ की सीधी जद में आ गया है। ईरान और अमेरिका के बीच गहराते तनाव ने अब एक ‘आर्थिक युद्ध’ का रूप ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा फैसले ने न केवल तेहरान, बल्कि नई दिल्ली की भी नींद उड़ा दी है।
“75% टैक्स का प्रहार—क्या अमेरिका और भारत के व्यापारिक रिश्तों में दरार आने वाली है?”
ट्रंप ने एक ऐसा ‘टैरिफ बम’ फोड़ा है जिसने ग्लोबल मार्केट में खलबली मचा दी है। उनका साफ़ संदेश है,”या तो आप हमारे साथ व्यापार करें, या ईरान के साथ।” भारतीय निर्यातकों के लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं है, क्योंकि अब अमेरिका में भारतीय सामान भेजना इतना महंगा हो सकता है कि बाजार में टिकना ही मुश्किल हो जाए। यह केवल एक टैक्स नहीं, बल्कि भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि “जो भी देश ईरान के साथ कारोबार करेगा, उसे अमेरिका के साथ व्यापार करने पर 25% अतिरिक्त टैरिफ देना होगा।” इस घोषणा के भारत पर पड़ने वाले प्रभावों का तथ्यात्मक विवरण नीचे दिया गया है

1. टैरिफ का गणित: 75% का आंकड़ा कैसे?
भारतीय माल पर पहले से ही अमेरिका में उच्च शुल्क लग रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अब यह बोझ बढ़ सकता है:
- 25% बेसिक टैरिफ: जो अमेरिका ने पहले ही भारतीय सामानों पर लगाया हुआ है।
- 25% रूसी तेल टैरिफ: रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के कारण भारत पर पहले से लागू अतिरिक्त जुर्माना।
- 25% ईरान टैरिफ: आज घोषित किया गया नया शुल्क। कुल मिलाकर अमेरिका जाने वाले भारतीय उत्पादों पर 75% तक प्रभावी शुल्क लग सकता है, जो निर्यातकों की कमर तोड़ देगा।
2. किन सेक्टरों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर?
भारत और ईरान के बीच 1.68 बिलियन डॉलर (लगभग 14,000 करोड़ रुपये) का व्यापार होता है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्र हैं
- कृषि: भारत ईरान को बड़े पैमाने पर बासमती चावल, चाय और चीनी निर्यात करता है।
- फार्मास्युटिकल्स: दवाइयों के निर्यात पर संकट मंडरा रहा है।
- केमिकल्स और ड्राई फ्रूट्स: ईरान से आने वाले सूखे मेवे और केमिकल्स महंगे हो सकते हैं।
3. चाबहार पोर्ट का भविष्य
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) है। यह प्रोजेक्ट मध्य एशिया तक पहुँचने का भारत का रणनीतिक रास्ता है। हालांकि पहले अमेरिका ने इस पर कुछ छूट दी थी, लेकिन नए ‘टैरिफ वॉर’ के तहत यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रोजेक्ट को निवेश के दायरे से बाहर रखा जाएगा या नहीं।

4. कूटनीतिक पेच
यह घोषणा ठीक उस समय हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े ट्रेड सौदे पर बातचीत चल रही थी। इसे भारत पर दबाव बनाने की रणनीति (Pressure Tactic) के रूप में देखा जा रहा है ताकि भारत अपने ऊर्जा स्रोतों और रणनीतिक रिश्तों को अमेरिका की इच्छा के अनुसार मोड़े।
क्या भारत को लगेगा एक और झटका?
रूसी तेल और हथियारों की खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से पहले ही भारत पर लागू 25% टैरिफ को बढ़ाकर 50% कर दिया गया है. अब ईरान पर ट्रंप की नई धमकी को देखें, तो भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 75% होने की आशंकाएं (US 75% Tariff On India) बढ़ गई हैं. हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत का ईरान से तेल आयात 2019 से ही बंद है. मतलब IOC, BPCL, HPCL या फिर कोई भी प्राइवेट रिफाइनरी ईरानी तेल की खरीद नहीं कर रही है, लेकिन इसके अलावा कई चीजों का आयात-निर्यात जारी है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत को इस टैरिफ से राहत नहीं मिलती, तो टेक्सटाइल, सीफूड और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों में निर्यात काफी गिर सकता है। फिलहाल, भारत का वाणिज्य मंत्रालय डेटा का विश्लेषण कर रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही वाशिंगटन के साथ उच्च स्तरीय बातचीत शुरू होगी। लेकिन ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ के कड़े रुख को देखते हुए, यह लड़ाई लंबी खिंच सकती है।









