भारतीय यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब पहले से कहीं अधिक सुगम होने वाली है। जर्मनी के ट्रांजिट वीजा नियमों में हालिया ढील ने यूरोप जाने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी बाधा हटा दी है।
पिछले लंबे समय से भारतीय पासपोर्ट धारकों को यूरोप के ‘शेंगेन क्षेत्र’ (Schengen Area) से होकर गुजरने के दौरान कड़े वीजा नियमों का सामना करना पड़ता था। विशेष रूप से फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख जैसे बड़े हवाई अड्डों का उपयोग करने के लिए भारतीयों को एयर-साइड ट्रांजिट वीजा (ATV) लेना अनिवार्य था, भले ही वे एयरपोर्ट से बाहर न निकल रहे हों। इस प्रक्रिया में न केवल समय की बर्बादी होती थी, बल्कि यात्रियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ता था। अब भारत-जर्मनी के बीच बढ़ते रणनीतिक और पर्यटन संबंधों को देखते हुए इन नियमों में बड़ी राहत दी गई है।
“यूरोप की उड़ान अब होगी और भी आसानबिना वीजा के जर्मनी में रुकें और आगे बढ़ें!”
भारतीय यात्रियों के लिए एक ऐसी खबर आई है जो सीधे उनकी जेब और समय की बचत करेगी। अब आपको जर्मनी के एयरपोर्ट्स पर घंटों रुकने के लिए दूतावास के चक्कर काटने और लंबी कागजी कार्रवाई की ज़रूरत नहीं होगी। क्या आप जानते हैं कि वह कौन सी ‘शर्त’ है जिसने अब तक भारतीयों को जर्मनी में रुकने से रोक रखा था? और आखिर यह ‘ट्रांजिट वीजा’ क्या बला है जिसे हटाने के लिए भारत सरकार वर्षों से कोशिश कर रही थी?

नहीं लेना होगा जर्मनी का ट्रांजिट वीजा
प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज के बीच हुई मीटिंग के बाद 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत और जर्मनी के लोगों के बीच संबंधों को और बेहतर करने के लिए यह फैसला भी लिया गया कि अब भारत के लोगों को ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं है, वे इसके बिना भी जर्मनी से होकर यात्रा कर सकते हैं।
किसे मिलेगी यह छूट?
यह राहत उन भारतीय नागरिकों को मिलेगी जिनके पास निम्नलिखित में से कोई एक दस्तावेज है।
- अमेरिका (USA), कनाडा, जापान या ब्रिटेन का वैध वीजा।
- शेंगेन क्षेत्र के किसी भी देश का वैध रेजिडेंस परमिट।
- डिप्लोमैटिक पासपोर्ट धारक।
ट्रांजिट वीजा क्या होता है?
ट्रांजिट वीजा (Transit Visa) एक अस्थायी अनुमति पत्र होता है जो किसी देश द्वारा उन यात्रियों को दिया जाता है जो वहां रुकने के बजाय केवल उस देश के हवाई अड्डे का उपयोग कर किसी तीसरे देश (जैसे भारत से अमेरिका जाते समय जर्मनी में रुकना) की ओर जा रहे हों। ट्रांजिट वीजा की वजह से ही भारत के लोगों को जर्मनी के एयरपोर्ट पर उतरने की परमिशन मिलती थी, लेकिन अब जर्मनी की सरकार के इस फैसले के बाद भारतीय नागरिकों को इस ट्रांजिट वीजा को लेने की जरूरत नहीं है, वे इसके बिना जर्मनी एयरपोर्ट से आवागमन कर सकते हैं।

एयर-साइड ट्रांजिट: इसमें यात्री एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय जोन से बाहर नहीं निकल सकता। जर्मनी ने अब भारतीय यात्रियों के एक बड़े वर्ग के लिए इस ‘एयर-साइड’ वीजा की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
- पैसे की बचत: ट्रांजिट वीजा के लिए लगने वाली भारी-भरकम फीस (लगभग 80 यूरो) अब नहीं देनी होगी।
- समय की बचत: वीजा आवेदन के लिए अपॉइंटमेंट और प्रोसेसिंग में लगने वाले 15-20 दिनों का झंझट खत्म।
- सस्ती फ्लाइट्स: अब यात्री जर्मनी (लुफ्थांसा जैसी एयरलाइंस) के रास्ते अमेरिका या कनाडा जाने वाली सस्ती कनेक्टिंग फ्लाइट्स बेफिक्र होकर बुक कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी का यह कदम भारत के साथ ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप’ का हिस्सा है। इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि व्यापारिक यात्राएं भी सुलभ होंगी। जर्मनी के बाद अब फ्रांस और नीदरलैंड जैसे अन्य यूरोपीय देश भी भारतीय यात्रियों के लिए इसी तरह के सरलीकरण पर विचार कर रहे हैं। यदि आपके पास अमेरिका या कनाडा का वैध वीजा है, तो अब आपकी यूरोप यात्रा बिना किसी कानूनी अड़चन के पूरी हो सकेगी।









