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UGC की नई नीतियों का विरोध! रायबरेली किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, पीएम मोदी को लिखा पत्र

BJP Leaders Resigned

BJP Leaders Resigned: देशभर में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की नई नीतियों को लेकर विरोध तेज हो गया है। रायबरेली के सलोन निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष (मंडल अध्यक्ष), श्याम सुंदर त्रिपाठी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में UGC की नई नीतियों (समानता विनियम 2026) को काला कानून बताया। उनके अनुसार, ये नियम सवर्ण समाज के बच्चों के हितों के खिलाफ हैं और समाज को बांटने वाले हैं।

श्याम सुंदर त्रिपाठी का इस्तीफा (BJP Leaders Resigned)

त्रिपाठी ने अपने पत्र में लिखा, “उच्च जाति के बच्चों के खिलाफ लाए गए आरक्षण विधेयक जैसे काले कानून के कारण मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूँ। यह कानून समाज के लिए बेहद खतरनाक और विभाजनकारी है। मैं इस विधेयक से पूरी तरह असंतुष्ट हूँ। इसके प्रति गहरा असंतोष है। मैं इस आरक्षण विधेयक का समर्थन नहीं करता। ऐसे अनैतिक विधेयक का समर्थन करना मेरे आत्मसम्मान और विचारधारा के घोर विरुद्ध है।”

नोएडा से राजू पंडित का इस्तीफा

नोएडा में बीजेपी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी UGC की नई नीति को “काला कानून” बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि यह नीति सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ है। राजू पंडित ने पार्टी के भीतर से ही सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका इस्तीफा बीजेपी के लिए और बड़ा संकेत है कि असंतोष बढ़ रहा है।

पार्टी के लिए बढ़ती चुनौती इन इस्तीफों से साफ है कि UGC की नई नीतियां बीजेपी के कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी पैदा कर रही हैं। यूपी के अलग-अलग जिलों में नेता और पदाधिकारी एक के बाद एक इस्तीफा दे रहे हैं। (BJP Leaders Resigned)

बिलसंडा क्षेत्र से भाजपा के कृष्ण कुमार तिवारी का इस्तीफा

बिलसंडा क्षेत्र के चपरौवा कुइयां गांव के भाजपा बूथ अध्यक्ष कृष्ण कुमार तिवारी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बिलसंडा मंडल अध्यक्ष को भेजे इस्तीफे में लिखा कि वे पार्टी द्वारा UGC और एससी-एसटी जैसे कानूनों का समर्थन करने और लागू करने से पूरी तरह असहमत हैं। उनका कहना है कि ये कानून समाज में विभाजन पैदा करते हैं।

कृष्ण कुमार तिवारी ने आगे कहा कि ऐसे निर्णयों के साथ जुड़े रहना उनके वैचारिक, सामाजिक और नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ है। यह उनके आत्मसम्मान और विचारधारा के विरुद्ध है। (BJP Leaders Resigned)

पहले लखनऊ में 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दिया था। अब रायबरेली, बिलसंडा और नोएडा से भी आवाजें उठ रही हैं। पार्टी के अंदर से ही सरकार की नीति पर सवाल उठना और पद छोड़ना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यह विरोध सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी असर डाल रहा है।

बरेली में प्रशासनिक विवाद

इस बीच, बरेली के जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह ने नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिन्होंने 26 जनवरी को बरेली के नगर मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा दे दिया था और आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश में “ब्राह्मण विरोधी अभियान” चल रहा है। (BJP Leaders Resigned)

डीएम सिंह ने एक बयान में कहा कि नगर मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए आरोप गलत बयानी का नतीजा हैं। डीएम ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बातचीत को सनसनीखेज आरोपों में बदलना उचित नहीं है। जिला प्रशासन ने पूरी घटना के दौरान संयम, संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है और आगे भी ऐसा ही करता रहेगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है और उन्हें शामली जिला मजिस्ट्रेट के अधीन कर दिया है। विशेष सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अग्निहोत्री जांच पूरी होने तक शामली के जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। (BJP Leaders Resigned)

अलंकार अग्निहोत्री की अपील

अग्निहोत्री ने ब्राह्मण जन प्रतिनिधियों से इस्तीफा देने और समुदाय के साथ खड़े होने की अपील की है, यह कहते हुए कि उनकी निष्क्रियता सामान्य वर्ग के “नरसंहार” का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा, “मैं ब्राह्मण समुदाय के सभी जन प्रतिनिधियों से अपील करता हूं कि वे तुरंत इस्तीफा देना शुरू करें और समुदाय के साथ खड़े हों। समय आ गया है; अन्यथा, आपका नरसंहार निश्चित है। आम जनता का नरसंहार निश्चित है क्योंकि आपके जन प्रतिनिधि कॉर्पोरेट कंपनियों के कर्मचारी बनकर सो रहे हैं। मैंने राज्यपाल को पत्र लिखा है। मैंने उत्तर प्रदेश के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा सौंप दिया है।”

UGC के नियमों का उद्देश्य 

गौरतलब है कि UGC ने 13 जनवरी को नए नियम अधिसूचित किए थे, जो साल 2012 के नियमों का अपडेट हैं। इन नियमों को लेकर जनरल कैटेगरी के छात्रों में नाराजगी देखने को मिल रही है। छात्रों का आरोप है कि यह फ्रेमवर्क उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है। (BJP Leaders Resigned)

UGC के नए नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना बताया गया है। इसके तहत शिक्षण संस्थानों को विशेष शिकायत निवारण समितियां और हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि खास तौर पर SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके।

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