Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राज्य सरकार ने 2014 के उस अध्यादेश से जुड़े आखिरी प्रशासनिक ढांचे को भी आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने का प्रावधान था। सरकार के इस कदम ने न केवल विपक्षी दलों को हमलावर कर दिया है, बल्कि मुस्लिम समुदाय के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
Maharashtra Politics: मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला
आपको बता दें, सरकार के इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में ‘हल्ला बोल’ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह फैसला न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग को मुख्यधारा से दूर रखने की साजिश है। प्रदर्शनकारी इसे ‘धर्म विरोधी’ कदम बता रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार एक विशेष विचारधारा को खुश करने के लिए मुस्लिम समाज के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अनदेखी कर रही है। (Maharashtra Politics)
सड़कों पर गूंजता ‘हल्ला बोल’
फिलहाल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उसे ‘मुस्लिम विरोधी’ करार दिया है। पार्टी का कहना है कि हाई कोर्ट ने शिक्षा में आरक्षण को हरी झंडी दी थी, लेकिन सरकार ने जानबूझकर इसे लागू करने के बजाय पूरी फाइल ही बंद कर दी। (Maharashtra Politics)
फिलहाल, सड़कों पर गूंजता ‘हल्ला बोल’ और लोगों का आक्रोश यह बता रहा है कि यह मामला शांत होने वाला नहीं है। जब सरकारें न्याय के तराजू को राजनीतिक चश्मे से देखती हैं, तो भरोसा डगमगाने लगता है। आज सत्ता के गलियारों में खामोशी है, लेकिन जनता की अदालत में सरकार का यह फैसला एक बड़े इम्तिहान की शुरुआत है।









