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शराब घोटाला: केजरीवाल-सिसोदिया को मिली बड़ी राहत, लेकिन सीबीआई की चुनौती ने बढ़ाया सस्पेंस; ‘आप’ का शक्ति प्रदर्शन और मोदी-शाह पर सीधा वार

केजरीवाल

दिल्ली की सियासत में शुक्रवार का दिन एक बड़े भूकंप की तरह साबित हुआ, जब राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े सीबीआई (CBI) मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को पूरी तरह आरोप मुक्त (Acquit) कर दिया। कोर्ट के करीब 600 पन्नों के इस विस्तृत आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि जांच एजेंसी आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई भी आपराधिक षड्यंत्र साबित करने में विफल रही है। हालांकि, अरविंद केजरीवाल के लिए यह राहत केवल सीबीआई मामले तक सीमित है, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। इस फैसले ने पिछले दो सालों से चल रही ‘भ्रष्टाचार बनाम ईमानदारी’ की जंग को एक नया मोड़ दे दिया है।

केजरीवाल का रोड शो और ’10 सीट’ वाली चुनावी चुनौती

अदालत से राहत मिलने के तुरंत बाद अरविंद केजरीवाल ने अपने आवास से पार्टी दफ्तर तक एक विशाल रोड शो किया, जहाँ उन्होंने हाथ में गदा लेकर समर्थकों का अभिवादन किया। इसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘आम आदमी पार्टी’ को खत्म करने की एक गहरी साजिश करार दिया। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि दिल्ली में फिर से चुनाव कराए जाएं और यदि भाजपा 10 से अधिक सीटें जीत गई, तो वे राजनीति छोड़ देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों से सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल केवल ‘झूठ का किला’ बनाने के लिए किया गया, जिसे आज अदालत ने ढहा दिया है। केजरीवाल ने भाजपा नेतृत्व से देश से माफी मांगने की मांग करते हुए अपने कार्यकर्ताओं को ‘कट्टर ईमानदार’ बताया।

सीबीआई का दिल्ली हाईकोर्ट की ओर रुख और कानूनी पेच

जहाँ एक तरफ ‘आप’ खेमा जश्न में डूबा है, वहीं केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने निचली अदालत के इस फैसले को स्वीकार करने के बजाय तुरंत दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सीबीआई ने हाईकोर्ट में अपनी अपील दायर कर राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिससे इस मामले में कानूनी लड़ाई का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। यहाँ यह समझना आवश्यक है कि सीबीआई की जांच मुख्य रूप से नीति निर्माण में हुई प्रक्रियागत गड़बड़ी और अनियमितताओं पर केंद्रित थी, जबकि ईडी इस नीति के जरिए हुए कथित धन शोधन (Money Laundering) की जांच कर रही है। कांग्रेस ने भी इस फैसले की ‘टाइमिंग’ को गुजरात चुनावों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, जिस पर केजरीवाल ने पलटवार करते हुए इसे विपक्ष की हताशा बताया है।

क्या था शराब नीति मामला और कैसे शुरू हुई जांच?

पूरे विवाद की जड़ ‘दिल्ली आबकारी नीति 2021-22’ है, जिसे कोरोना काल के दौरान लागू किया गया था। इस नीति के क्रियान्वयन में अनियमितता की शिकायतों के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। अगस्त 2022 में 15 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के साथ ही यह मामला सुर्खियों में आ गया, जिसके बाद ईडी ने भी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच शुरू कर दी। बढ़ते विवादों के बीच दिल्ली सरकार ने इस नई नीति को रद्द कर पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी थी। अब जबकि कोर्ट ने सीबीआई मामले में सबूतों के अभाव का जिक्र किया है, यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकोर्ट में सीबीआई की दलीलें क्या रहती हैं और ईडी के मामले पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

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