Siachen Avalanche: लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में एक भीषण हिमस्खलन की घटना में भारतीय सेना के तीन जवान शहीद हो गए हैं। हिमस्खलन की घटना सियाचिन बेस कैंप के पास हुई, जो दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र माना जाता है। यहाँ तापमान अक्सर -60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, जिससे जीवित रहना और सैन्य अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
जानकारी के मुताबिक, ये जवान महार रेजिमेंट के थे और गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा झारखंड के रहने वाले थे। हिमस्खलन की इस घटना में दो अग्निवीर भी शामिल हैं। इन शहीद जवानों के नाम हैं सिपाही मोहित कुमार, अग्निवीर नीरज कुमार चौधरी और अग्निवीर डाभी राकेश देवभाई। पांच जवान हिमस्खलन में फंसे हुए हैं। एक कैप्टन को बचाया गया है। सेना की बचाव टीमें तुरंत काम पर लग गई हैं, जो लेह और उधमपुर से मदद ले रही हैं।

भारतीय सेना के फायर एंड फ्यूरी कोर के आधिकारिक एक्स अकाउंट ने पोस्ट किया, “जीओसी, फायर एंड फ्यूरी कोर और सभी रैंक सिपाही मोहित कुमार, अग्निवीर नीरज कुमार चौधरी और अग्निवीर दभी राकेश देवभाई को सलाम करते हैं, जिन्होंने 09 सितंबर 2025 को #सियाचिन में कर्तव्य की पंक्ति में सर्वोच्च बलिदान दिया और इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।”

बचाव कार्य और सेना की कोशिशें
हिमस्खलन की खबर मिलते ही भारतीय सेना और वायुसेना ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिए। विशेषज्ञ अवलांच रेस्क्यू टीमें (ART) मौके पर पहुंचीं, जो बर्फ में दबे जवानों को निकालने की कोशिश कर रही हैं। ये टीमें लेह और उधमपुर से समन्वय कर रही हैं। सेना के हेलिकॉप्टर, जैसे चीता और Mi-17, घायलों को निकालने और अस्पताल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। सियाचिन में ऐसी आपात स्थिति के लिए सेना हमेशा तैयार रहती है, लेकिन बर्फ और ठंड की वजह से बचाव कार्य बेहद मुश्किल है।
विश्व का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है सियाचिन
सियाचिन विश्व का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है, जो भारत, पाकिस्तान और चीन के परमाणु त्रि-जंक्शन पर स्थित है। हाल के अनुमानों और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सियाचिन में एक ब्रिगेड (लगभग 5,000 सैनिक) को रखने के लिए हर दिन लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। 1949 के कराची समझौते के बाद से ही सियाचिन भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का विषय रहा है, जब दुर्गम भूभाग और अत्यंत खराब मौसम के कारण इस क्षेत्र को अविभाजित छोड़ दिया गया था।

पिछली घटनाएं:
- 2021 में सब-सेक्टर हनीफ में एक हिमस्खलन हुआ था, जिसमें दो सैनिक मारे गए थे।
- 2019 में 18,000 फीट की ऊंचाई पर एक चौकी के पास गश्त कर रहे चार सैनिकों और दो पोर्टरों की एक भीषण हिमस्खलन में जान चली गई थी।
- 3 फरवरी, 2016 को 19,600 फीट की ऊंचाई पर एक और विनाशकारी हिमस्खलन में दस सैनिक दब गए थे।









