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राष्ट्रपति का अपमान या प्रशासनिक चूक? दार्जिलिंग सम्मेलन पर छिड़ा सियासी घमासान, PM बोले- TMC ने की सारी हदें पार…

Santal Conference Row

Santal Conference Row: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दार्जिलिंग में 9वें अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में अव्यवस्था और ममता बनर्जी की अनुपस्थिति पर निराशा जताई, जिसके बाद पीएम मोदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पीएम मोदी ने इसे आदिवासी समुदाय और राष्ट्रपति का शर्मनाक अपमान बताते हुए टीएमसी सरकार को घेरा, जबकि टीएमसी ने इन आरोपों को गलत धारणा बताया। 

Santal Conference Row: पीएम मोदी का ममता सरकार पर तीखा प्रहार

राष्ट्रपति मुर्मू की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह घटना ‘शर्मनाक और अभूतपूर्व’ थी। लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति निराश है। स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति जी द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने भारत की जनता के मन में अपार दुख पैदा कर दिया है।

प्रधानमंत्री ने इस स्थिति के लिए राज्य की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि प्रशासन ने राष्ट्रपति का अपमान किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है। (Santal Conference Row)

पीएम ने आगे कहा कि यह घटना संथाल संस्कृति से जुड़े मामलों के प्रति राज्य सरकार के रवैये को भी बुरी तरह से उजागर करती है। पीएम ने कहा कि यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को इतनी लापरवाही से लिया जाता है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी में समझदारी आएगी। (Santal Conference Row)

निर्मला सीतारमण ने संवैधानिक गरिमा पर जताई चिंता

इसी बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी राष्ट्रपति की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्थिति को अभूतपूर्व बताया। सीतारमण ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति भवन द्वारा व्यक्त की गई यह पीड़ा दुर्लभ और गहरे दर्द से भरी है। यह अभूतपूर्व है। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि आधिकारिक दौरों के दौरान राष्ट्रपति के संवैधानिक पद के अनुरूप सभी प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

ये टिप्पणियां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिन में पहले नौवें अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के आयोजनों पर निराशा व्यक्त करने, आयोजन स्थल के चयन पर सवाल उठाने और संथाल समुदाय के कई सदस्यों के कार्यक्रम में शामिल न हो पाने पर खेद व्यक्त करने के बाद आईं। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति पर भी टिप्पणी की। (Santal Conference Row)

राष्ट्रपति ने खुद गिनाईं प्रशासन की कमियां (Santal Conference Row)

यहां सम्मेलन में भाग लेने के बाद बोलते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह कार्यक्रम एक बड़े स्थान पर आयोजित किया जा सकता था जिससे संथाल समुदाय की अधिक भागीदारी संभव हो पाती। उन्होंने कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन था। इसमें भाग लेने के बाद जब मैं यहाँ आई, तो मुझे एहसास हुआ कि अगर यह सम्मेलन यहीं आयोजित होता तो बेहतर होता, क्योंकि यह क्षेत्र बहुत विशाल है। मुझे नहीं पता प्रशासन के मन में क्या चल रहा था। उन्होंने कहा कि जगह भीड़भाड़ वाली है, लेकिन मुझे लगता है कि यहाँ आसानी से पाँच लाख लोग इकट्ठा हो सकते थे। (Santal Conference Row)

राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि सम्मेलन स्थल दूर होने के कारण संथाल समुदाय के कई सदस्य इसमें शामिल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि मुझे बहुत दुख है कि यहां के लोग सम्मेलन में नहीं पहुंच सके क्योंकि यह बहुत दूर आयोजित किया गया था। मुझे नहीं पता कि प्रशासन के मन में क्या चल रहा था कि उन्होंने ऐसी जगह चुनी जहां संथाल लोग नहीं जा सकते।

राष्ट्रपति ने आगे सुझाव दिया कि इस निर्णय के कारण कार्यक्रम में उपस्थिति सीमित हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि शायद प्रशासन को उम्मीद थी कि कोई भी उपस्थित नहीं हो पाएगा और राष्ट्रपति बस मुड़कर चले जाएंगे। (Santal Conference Row)

राष्ट्रपति ने राज्य नेतृत्व की अनुपस्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान वरिष्ठ राज्य अधिकारियों की उपस्थिति प्रथा है। मुर्मू ने बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर राष्ट्रपति किसी जगह का दौरा करते हैं, तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी आना चाहिए। लेकिन वह नहीं आईं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा कि वह खुद को राज्य से गहराई से जुड़ा हुआ मानती हैं। उन्होंने कहा कि मैं भी बंगाल की बेटी हूं। ममता दीदी भी मेरी बहन हैं, मेरी छोटी बहन। मुझे नहीं पता कि वह मुझसे नाराज थीं या नहीं, जिसकी वजह से ऐसा हुआ। (Santal Conference Row)

जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना था, लेकिन बाद में इसे बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोसाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसके लिए अधिकारियों ने सुरक्षा और रसद का हवाला दिया। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति को राज्य के आदिवासी कल्याण रिकॉर्ड के बारे में गलत धारणा है। राज्य के वन मंत्री बीरबाहा हांसदा ने भी सरकार का बचाव किया।


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