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युद्ध की आग के बीच भारत पहुँचा ‘Shivalik’; कैसे कूटनीति ने मुमकिन बनाया 32 लाख परिवारों का चूल्हा जलना?

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी भीषण जंग के बीच भारत के लिए आज शाम एक सुखद खबर आई। भारी तनाव और मिसाइलों के साये में कतर से रवाना हुआ भारतीय LPG जहाज ‘Shivalik’ सोमवार शाम 5 बजे गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षित पहुँच गया है। यह संघर्ष शुरू होने के बाद भारत पहुँचने वाला पहला गैस टैंकर है। इसकी अहमियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस एक जहाज पर लदी 46 हजार मीट्रिक टन गैस से करीब 32.4 लाख घरेलू सिलेंडरों की जरूरत पूरी होगी।

मिशन ‘होर्मुज’: जयशंकर की कूटनीति और जहाजों की घर वापसी

14 मार्च को जब ‘Shivalik’ ने दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को पार किया था, तब पूरे देश की सांसें थमी हुई थीं। विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरान के साथ सीधी बातचीत का ही नतीजा है कि भारतीय झंडे वाले जहाजों को बिना किसी सैन्य टकराव के रास्ता मिल रहा है। शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, अभी राहत का सिलसिला थमा नहीं है:

  • ‘नंदा देवी’ जहाज: 46 हजार टन LPG लेकर कल भारत पहुँचेगा।
  • ‘जग लाडकी’ जहाज: करीब 81 हजार टन कच्चा तेल लेकर कल मुंद्रा पोर्ट पहुँचेगा। फारस की खाड़ी में अभी भी भारत के 22 जहाज और 611 नाविक मौजूद हैं, जिन पर सरकार 24 घंटे नजर रखे हुए है।

ब्रिटेन, जर्मनी और ग्रीस ने खींचे हाथ; ट्रंप की योजना को झटका?

एक तरफ भारत अपनी ‘सॉफ्ट पावर’ से रास्ता निकाल रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन में दरारें दिखने लगी हैं। डोनाल्ड ट्रंप की अपील के बावजूद यूरोप के देशों ने इस युद्ध से दूरी बना ली है:

  • ब्रिटेन: प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कर दिया कि उनका देश इस व्यापक युद्ध में शामिल नहीं होगा। उनकी प्राथमिकता केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा है।
  • जर्मनी और ग्रीस: दोनों देशों ने होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए किसी भी सैन्य अभियान में हिस्सा लेने से मना कर दिया है। जर्मनी का कहना है कि यह ‘नाटो’ का मामला नहीं है। इससे यह साफ हो गया है कि दुनिया के ताकतवर देश अब अमेरिका के सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ईरान से रेस्क्यू: जमीन के रास्ते अजरबैजान पहुँचे भारतीय

जंग के मैदान से केवल जहाज ही नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों को निकालने का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 90 भारतीय नागरिक ईरान से जमीन के रास्ते अजरबैजान पहुँच गए हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कठिन परिस्थितियों में भी इन लोगों के वीजा और इमिग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी करवाईं। इसके अलावा, करीब 550 लोग आर्मेनिया के रास्ते निकाले जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या तीर्थयात्रियों की है। दूतावास ने तेहरान के बाहर फंसे छात्रों को भी सुरक्षित शहरों में शिफ्ट कर दिया है।

कूटनीति बनाम ताकत की जंग

जहाँ इजराइल ने तेहरान के एयरपोर्ट पर एयरस्ट्राइक कर ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के प्लेन को तबाह करने का दावा किया है, वहीं भारत ने इसी तनाव के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को पक्का किया है। यह जीत केवल पेट्रोल या गैस की नहीं, बल्कि भारत के उस ‘मिडिल पाथ’ की है जहाँ हम किसी खेमे में शामिल हुए बिना अपनी जरूरतों को सुरक्षित रख पा रहे हैं। आने वाले दो दिन भारत के लिए बेहद अहम हैं, क्योंकि तेल और गैस के दो और बड़े जहाज भारतीय तटों पर उतरने वाले हैं। Shivalik

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