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UP में ‘छत’ का नया संकल्प: केशव मौर्य का बड़ा फैसला, अब इन जनजातियों को भी मिलेगा पक्का घर

UP CM Awas Yojana Gramin Expansion 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज एक ऐसा फैसला सामने आया है, जो जमीन पर बदलती हकीकत की सीधी तस्वीर है। दरअसल, योगी सरकार ने ‘मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ का दायरा अब और बढ़ा दिया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी वंचित जनजाति पक्की छत से दूर नहीं रहेगी।


नए समुदायों को मिला हक: भोटिया, जौनसारी और राजी शामिल

सरकार ने उन समुदायों को भी इस योजना में शामिल कर लिया है, जो अब तक सूची से बाहर थे। यही वजह है कि भोटिया, जौनसारी और राजी जैसे समुदायों में खुशी की लहर है।

  • सुरक्षा और सम्मान: ये समुदाय सालों से कच्चे घरों और झोपड़ियों में रहने को मजबूर थे।
  • मुख्यधारा से जुड़ाव: यह फैसला उन्हें न सिर्फ घर देगा, बल्कि समाज में एक नई पहचान और सुरक्षा भी प्रदान करेगा।
  • वोट बैंक नहीं, सशक्तिकरण: केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पहले इन जातियों को सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल किया गया। लेकिन, अब सरकार इन्हें असल मायने में सशक्त बना रही है।

2018 से 2026: कैसे बढ़ा योजना का दायरा?

इस योजना का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। दरअसल, इसकी शुरुआत 2018 में वनटांगिया और मुसहर जैसी जातियों से हुई थी।

  1. पुराना दायरा: शुरुआत में इसमें कोल, थारू, सहरिया और नट जैसे समूह शामिल थे।
  2. 2026 का विस्तार: अब इसमें गोंड, धुरिया, ओझा, नायक और खरवार समेत 18 से ज्यादा नए समूहों को जोड़ दिया गया है।
  3. तेजी से सर्वे: सरकार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी पात्र परिवार इस बार छूटने न पाए।

परिणामस्वरूप, यह योजना अब समाज के सबसे कमजोर वर्ग को मजबूती देने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुकी है।


लोकल इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा

जब हजारों परिवारों को पक्का मकान मिलेगा, तो इसका असर केवल रहने तक सीमित नहीं रहेगा। दरअसल, गांवों में निर्माण कार्य तेज होने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यही नहीं, इससे लोकल इकोनॉमी को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।


2027 की सियासी बिसात और सामाजिक न्याय

राजनीतिक नजरिए से भी यह फैसला बेहद अहम है। दरअसल, 2027 के चुनाव करीब हैं और सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के वादे को जमीन पर उतार रही है। अंततः, असली सामाजिक न्याय तभी दिखेगा जब एक बंजारा या भोटिया परिवार अपने घर की चाबी हाथ में लेगा। यही वजह है कि इस फैसले को योगी सरकार का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

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