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‘सात लोग गलत नहीं हो सकते…’, BJP में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा का AAP पर हमला, बताया- क्यों छोड़ी अपनी ही बनाई पार्टी?

Raghav Chadha attack on AAP

Raghav Chadha attack on AAP: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपनी पूर्व पार्टी और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व पर सीधा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का मुख्य कारण बताया है।

चड्ढा ने आरोप लगाया कि वे लंबे समय तक ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ बने रहे और अंततः पार्टी के “दमघोंटू माहौल” ने उन्हें बाहर जाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि AAP बदल गई है और अब इसका नेतृत्व ऐसे भ्रष्ट राजनेता कर रहे हैं जो सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए काम कर रहे हैं।

Raghav Chadha attack on AAP: राघव चड्ढा ने क्यों छोड़ी अपनी पुरानी पार्टी?

राघव चड्ढा ने कहा, ‘पिछले तीन दिनों से मुझे बहुत सारे मैसेज आ रहे हैं। आप में से ज्यादातर लोग मुझे बेस्ट विशेज दे रहे हैं, बधाई दे रहे हैं और कुछ लोग मेरे इस फैसले के पीछे का कारण जानना चाहते हैं। तो आज ये वीडियो उन लोगों के लिए और उन लोगों के लिए भी जिन्होंने शायद मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं देखी।’

चड्ढा ने कहा, ‘राजनीति में आने से पहले मैं प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट था। एक बेहतरीन करियर था, लेकिन मैं उस बेहतरीन करियर को छोड़कर राजनीति में आया। अपने करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। और एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना। जिस पार्टी को मैंने अपनी प्राइम युथ के 15 साल दिए अपने खून पसीने और बहुत मेहनत से इस पार्टी को सींचा, लेकिन आज यह पार्टी वो पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरनमेंट है।’ (Raghav Chadha attack on AAP)

पार्टी के मौजूदा कामकाज के तरीके की आलोचना करते हुए चड्ढा ने कहा, ‘आपको काम करने से रोका जाता है। संसद में बोलने से रोका जाता है। यह पार्टी अब चंद भ्रष्ट और कॉमप्रोमाइज्ड लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है। जो देश के लिए नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम कर रहे हैं।’

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों से पार्टी में धीरे-धीरे खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि वे लंबे समय तक “गलत पार्टी में सही आदमी” बने रहे। उन्होंने कहा, ‘इसके चलते मेरे सामने तीन विकल्प थे। पहला विकल्प यह था कि मैं पॉलिटिक्स ही छोड़ दूं, दूसरा विकल्प यह था कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं। (Raghav Chadha attack on AAP)

तीसरा विकल्प था कि मैं अपनी एनर्जी और एक्सपीरियंस लेकर पॉजिटिव राजनीति करूं- एक और प्लेटफॉर्म के साथ, एक अन्य राजनीतिक पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करूं। इसीलिए मैंने अकेले ने नहीं, मेरे साथ एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं, पांच नहीं, छह नहीं बल्कि कुछ सात सांसदों ने मिलकर यह फैसला लिया कि हम अपनी इस राजनीतिक पार्टी से रिश्ता तोड़ते हैं। “

‘सात लोग गलत नहीं हो सकते’

राघव ने आगे कहा, ‘एक आदमी गलत हो सकता है, दो गलत हो सकते हैं लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। और वो तमाम लोग जो पढ़े-लिखे लोग थे, जो इस पार्टी के सपने के साथ जुड़े थे वो तमाम लोग छोड़कर चले गए। क्या वो सारे गलत हो सकते हैं?’ (Raghav Chadha attack on AAP)

दबाव या डर की वजह से आप छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने के आरोपों को राघव चड्डा ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘आप ऐसे समझिए, आप में से जितने ऑफिस जाने वाले लोग हैं और अगर आपका वर्क प्लेस टॉक्सिक माहौल वाला हो जाए तो क्या आप काम कर पाएंगे? आप कितना काम कर पाएंगे? आपके काम को दबाया जाए, आपको चुप कराया जाए तो आप क्या करेंगे? उस स्थिति में सही फैसला वही है कि आप उस वर्क प्लेस को छोड़ दें। शायद हमने भी वही किया।’

राघव चड्डा ने आगे कहा कि बहुत सारे लोगों ने उनसे पूछा कि क्या आप अब भी आम लोगों के साधारण मुद्दे और समस्याओं को उठाते रहेंगे? इस पर राघव ने कहा कि मैं और ज्यादा एनर्जी और जोश के साथ आपके मुद्दों को उठाता रहूंगा और उन समस्याओं का समाधान ढूंढने के साथ ही उन्हें लागू भी करा पाएंगे। (Raghav Chadha attack on AAP)

संसद में AAP को लगा बड़ा झटका

इस बीच, राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की संख्या 113 हो गई है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी है। अपने दो-तिहाई सांसदों को खोना आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है, जिसकी वजह से अब संसद के ऊपरी सदन में उसके पास केवल तीन सदस्य ही रह गए हैं।

तीनों सांसद – राघव चड्डा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल – शुक्रवार को आम आदमी पार्टी से अलग हो गए और पार्टी नेतृत्व की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गए। इनके अलावा, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल भी भाजपा में चले गए थे। (Raghav Chadha attack on AAP)

संजय सिंह की याचिका और कानूनी चुनौती

वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन से सात सांसदों को अयोग्य घोषित करने के लिए आधिकारिक तौर पर याचिका दायर की थी। याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 4 के तहत कथित विलय को चुनौती दी गई और इसके अनुच्छेद 2 (1) (ए) के तहत सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई।

दसवीं अनुसूची का अनुच्छेद 2 दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से संबंधित है। उप-अनुच्छेद (1) में यह प्रावधान है कि अनुच्छेद 4 और 5 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी भी राजनीतिक दल से संबंधित सदन का सदस्य सदन का सदस्य होने के लिए अयोग्य होगा। (Raghav Chadha attack on AAP)

इस उप-अनुच्छेद के खंड (क) में आगे यह निर्दिष्ट किया गया है कि यदि सदस्य स्वेच्छा से उस राजनीतिक दल की सदस्यता त्याग देता है तो ऐसी अयोग्यता लागू होती है। सिंह ने संविधान में निहित आवश्यकताओं का हवाला देते हुए विलय की वैधता को चुनौती दी।

क्या यह विलय संवैधानिक रूप से सही है?

हालांकि, दसवीं अनुसूची के अनुसार, किसी मूल राजनीतिक दल के किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय होने की स्थिति में सांसदों की अयोग्यता नहीं हो सकती, बशर्ते विलय में दो-तिहाई सदस्य शामिल हों। आम आदमी पार्टी के सात सांसदों ने भाजपा के साथ विलय करके इस शर्त को पूरा किया। इस कदम से आम आदमी पार्टी के नेताओं में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है, जिन्होंने इसे विश्वासघात करार दिया है, जबकि भाजपा ने इसका गर्मजोशी से स्वागत किया है। (Raghav Chadha attack on AAP)


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