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उत्तर प्रदेश विधानसभा ने महिला आरक्षण पर विशेष सत्र बुलाया; भाजपा ने विपक्ष की आलोचना की, सपा ने किया विरोध प्रदर्शन

UP Women Reservation

UP Special Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा ने गुरुवार को महिला विधायकों के लिए आरक्षण पर चर्चा करने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया। भाजपा नेताओं ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए उनकी कड़ी आलोचना की। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिला आरक्षण में बाधाएं पैदा करने के लिए सपा और कांग्रेस को 2027 के विधानसभा चुनावों में दंडित किया जाएगा।

UP Special Session: महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा का विशेष सत्र

मौर्य ने बताया, ‘विधानसभा सत्र से पहले विधानसभा दलों की बैठक होती है, और ठीक यही हो रहा है।महिलाओं के सम्मान में भाजपा मैदान में उतरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आधी आबादी को उनके अधिकार मिलें। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी ने इसमें बाधा डाली है, और उन्हें इसका दंड मिलेगा। ममता बनर्जी को 2026 में इसका दंड मिल चुका है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को 2027 में इसका दंड मिलेगा।’

वहीं, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संबंध में एक विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। इसमें कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसी महिला विरोधी पार्टियों का पर्दाफाश किया जाएगा। (UP Special Session)

उत्तर प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि विशेष सत्र से महिलाओं को यह पता चलेगा कि कौन सी पार्टी उनके साथ खड़ी है और कौन सी उनके खिलाफ। उन्होंने कहा, ‘राज्य और देश की नारी शक्ति को यह जानने का अधिकार है कि कौन उनके खिलाफ, उनके हितों के विरुद्ध साजिश रच रहा है। यह विशेष सत्र उन्हें यह संदेश देने का काम करेगा कि कौन उनके पक्ष में है और कौन उनके खिलाफ है।’

विपक्ष का पलटवार: क्या महिला आरक्षण के पीछे छिपा है कोई और एजेंडा?

मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली की विधानसभाओं में भी महिला सशक्तिकरण और आरक्षण पर चर्चा के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए। ओडिशा में भी आज एक विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। इसी बीच, समाजवादी पार्टी के नेताओं ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के आयोजन का विरोध किया। सपा नेता जाहिद बेग ने संसद में खारिज हुए विधेयक पर चर्चा के लिए सत्र बुलाने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की। (UP Special Session)

ज़ाहिद बेग ने कहा, ‘आज सरकार ने विधानसभा बुलाई है। वे एक ऐसे विधेयक के लिए विधानसभा बुला रहे हैं, जिसे संसद ने खारिज कर दिया था। इसके लिए विधानसभा बुलाने का कोई औचित्य नहीं है। भाजपा सदस्य जनता और महिलाओं को गुमराह कर रहे हैं ताकि इसे लागू न किया जाए। अखिलेश यादव मांग कर रहे हैं कि पिछड़े वर्गों को भी आरक्षण दिया जाए। भाजपा ने उत्तर और दक्षिण में विवाद पैदा करने के लिए यह सब किया है।’

देशभर में उठती बहस: महिला सशक्तिकरण पर राजनीति तेज

समाजवादी पार्टी के नेता संग्राम सिंह यादव ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह परिसीमन विधेयक को महिलाओं के आरक्षण की आड़ में ला रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में विपक्ष ने विधानसभा में इस पर चर्चा के लिए समय बढ़ाने की मांग की है। (UP Special Session)

यादव ने कहा, ‘उन्होंने (राज्य सरकार ने) 5 घंटे की चर्चा स्वीकार कर ली है। एकजुट विपक्ष ने समय बढ़ाने की मांग की, लेकिन हमारी बातों पर पूरा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वे दिखावटी बातों से देश और राज्य को गुमराह करना चाहते हैं। उन्होंने परिसीमन विधेयक को महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में लाया, जिसके कारण वह गिर गया, और अब वे कह रहे हैं कि समाजवादी पार्टी महिला विरोधी है। समाजवादी पार्टी हमेशा समानता की बात करती है। हमारी पार्टी हमेशा कमजोर, पिछड़े, दलित, आदिवासी, मुस्लिम और महिलाओं के साथ खड़ी है। हम भाजपा का पर्दाफाश करेंगे।’

यह घटनाक्रम लोकसभा में विपक्षी दलों द्वारा 17 अप्रैल को संविधान संशोधन विधेयक के विरोध में मतदान करने के बाद सामने आया है। लोकसभा ने संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को एक साथ पारित करने के लिए विचार किया। तीनों विधेयकों पर बहस के बाद संविधान संशोधन विधेयक पर हुए मतदान में 298 सदस्यों ने पक्ष में और 230 सदस्यों ने विपक्ष में मतदान किया। (UP Special Session)

इन विधेयकों का उद्देश्य 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को लागू करना और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षित सीटें प्रदान करना था। विपक्ष ने परिसीमन की आलोचना करते हुए महिला आरक्षण का समर्थन किया।


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