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‘चुनाव खत्म होते ही संकट क्यों याद आया’? अखिलेश यादव ने PM मोदी की सात सूत्री अपील को लेकर भाजपा पर निशाना साधा

West Asia Crisis

West Asia Crisis: समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात सूत्रीय अपील को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया संकट के बीच नागरिकों से की गई यह अपील भाजपा सरकार की अपनी ‘विफलता की स्वीकारोक्ति’ है। उन्होंने सात सूत्रीय अपील के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही भाजपा को संकट याद आ गया है।

10 मई 2026 को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य पूर्व (West Asia) में जारी संघर्ष और वैश्विक तेल संकट के बीच नागरिकों से जिम्मेदार उपभोग अपनाने की अपील की। उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ईंधन बचाने, वर्क-फ्रॉम-होम, और सोने की खरीदारी कम करने जैसे सख्त आर्थिक उपायों की अपील की।

West Asia Crisis: डॉलर की मजबूती और रुपये की गिरावट पर केंद्र सरकार को घेरते दिखे अखिलेश

सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए यादव ने लिखा, ‘चुनाव खत्म होते ही ‘संकट’ का ख्याल मन में आया! दरअसल, देश के लिए केवल एक ही ‘संकट’ है, और उसका नाम है ‘भाजपा’।” सरकार के आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए यादव ने कहा कि अगर इतनी पाबंदियां लगानी ही थीं, तो ‘पांच खरब डॉलर की जुमला अर्थव्यवस्था’ कैसे साकार होगी? ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार के हाथों से सत्ता की बागडोर पूरी तरह से छिन गई है। उन्होंने आगे कहा कि डॉलर आसमान छू रहा है, और देश का रुपया तेजी से गिरावट की ओर बढ़ रहा है। (West Asia Crisis)

अखिलेश यादव की ये टिप्पणियां केंद्र के इस दावे को निशाना बनाकर की गईं कि भारत 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और अगले तीन वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।प्रधानमंत्री द्वारा सोने की खरीद कम करने के आह्वान पर, सपा प्रमुख ने कहा कि यह अपील आम नागरिकों के बजाय उनके अपने भ्रष्ट लोगों से की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘आम जनता वैसे भी 1.5 लाख तोला सोना नहीं खरीद रही है। ये तो भाजपा के वफादार लोग हैं जो अपने काले धन पर सोने की परत चढ़ाने में व्यस्त हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि अगर हमारी बात गलत लगे तो ‘लखनऊ से गोरखपुर’ या ‘अहमदाबाद से गुवाहाटी’ तक की दूरी देख लीजिए। (West Asia Crisis)

‘क्या पाबंदियां सिर्फ जनता के लिए हैं?’ चुनावी खर्च और चार्टर फ्लाइट्स पर उठाए सवाल

यादव ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव के बाद ही प्रतिबंधों की घोषणा क्यों की गई। उनका इशारा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में भाजपा के व्यापक चुनाव प्रचार की ओर था। उन्होंने कहा, ‘क्या चुनाव के दौरान भाजपा के लोगों ने जिन हजारों चार्टर उड़ानों का इस्तेमाल किया, वे पानी पर नहीं उड़ रही थीं? क्या वे होटलों में नहीं ठहर रहे थे, या सिलेंडरों की तस्वीरों से खाना नहीं बना रहे थे? भाजपा ने अपना चुनाव प्रचार सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए क्यों नहीं किया? क्या ये सभी प्रतिबंध सिर्फ आम जनता के लिए हैं?’ (West Asia Crisis)

सपा नेता ने कहा कि इस तरह की अपील से मंदी या मुद्रास्फीति की आशंकाओं के कारण व्यापार, कारोबार और बाजारों में दहशत, बेचैनी और निराशा के साथ-साथ डर ही फैलेगा। सरकार का काम अपने विशाल संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करके हमें आपातकालीन स्थितियों से बाहर निकालना है, न कि डर या अराजकता फैलाना।

गुटनिरपेक्ष विदेश नीति से भटकाव का आरोप, महंगाई और बेरोजगारी को बताया बड़ी मार

केंद्र की विदेश नीति को निशाना बनाते हुए, समाजवादी पार्टी के नेता ने दावा किया कि भाजपा भारत के पारंपरिक गुटनिरपेक्ष दृष्टिकोण से भटक गई है। उन्होंने कहा, ‘अगर वे सरकार नहीं चला सकते, तो भाजपा के लोगों को अपनी विफलता स्वीकार कर लेनी चाहिए-देश को बर्बाद मत करो। वैसे भी, इन परिस्थितियों का असली कारण भाजपा सरकार का देश की पारंपरिक ‘गुटनिरपेक्ष’ विदेश नीति से भटकना और कुछ विशेष कारणों और दबावों के चलते कुछ समूहों का पीछा करना है।’ (West Asia Crisis)

यादव ने आगे कहा कि देश के लोग महंगाई, बेरोजगारी, नौकरी की कमी और मंदी के रूप में इसकी कीमत चुका रहे हैं। किसानों और मजदूरों से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, हर दफ्तर जाने वाला, पेशेवर, व्यापारी-हर कोई इसकी चपेट में आ गया है।

पीएम मोदी की सात सूत्रीय अपील को सपा ने बताया ‘सरकारी विफलता की स्वीकारोक्ति’

सरकार की अपील को विफलता की स्वीकारोक्ति बताते हुए यादव ने कहा कि भाजपा घरेलू और विदेश नीति दोनों मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने कहा, ‘सच तो यह है कि भाजपा विदेश नीति और घरेलू नीति दोनों में विफल रही है। यह अपील भाजपा सरकार की अपनी विफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल, जैसे ही वोटों की गिनती शुरू हुई, भाजपा की खामियां उजागर हो गईं। (West Asia Crisis)

भाजपा के लोगों ने चुनाव के दौरान घोटालों से राजनीति को दूषित किया है। उन्होंने नफरत फैलाकर सामाजिक सद्भाव को नष्ट किया है। अपने आचरण से उन्होंने संस्कृति और मूल्यों को कलंकित किया है। उन्होंने धर्म को भी नहीं बख्शा, संतों और ऋषियों पर हमले और आरोप लगाए-और अब वे अर्थव्यवस्था को लेकर रो रहे हैं। इस तरह भाजपा ने देश को हर क्षेत्र में बर्बाद कर दिया है – सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक।


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