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“6 फरवरी तक SC/ST एक्ट वापस लें, वरना उखाड़ फेंकेगें सरकार”, Alankar Agnihotri का केंद्र को अल्टीमेटम

Alankar Agnihotri

Alankar Agnihotri: बरेली के निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने वाराणसी में मीडिया से बात करते हुए सरकार को एक स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है।

Alankar Agnihotri का सरकार को अल्टीमेटम

अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 6 फरवरी 2026 तक इस “काले कानून” (SC/ST Act) को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा तक कानून वापस नहीं लिया गया, तो केंद्र सरकार को चार्टर्ड प्लेन में बैठाकर वापस गुजरात भेज दिया जाएगा और दिल्ली में इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के निमंत्रण पर अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) रविवार रात वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने संत से मुलाकात कर आगे की योजनाओं पर चर्चा की। अग्निहोत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए दिशानिर्देशों पर रोक लगा दी गई है, लेकिन बड़ा मुद्दा SC/ST अधिनियम को समाप्त करना है, और उन्होंने कहा कि अगर इसे 6 फरवरी तक वापस नहीं लिया गया तो केंद्र में सरकार गिर जाएगी।

जब उनसे पूछा गया कि जब प्रारंभिक संघर्ष राज्य सरकार के साथ था तो अब वे केंद्र सरकार को क्यों निशाना बना रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि लड़ाई वास्तव में कभी राज्य सरकार के साथ नहीं थी बल्कि मुख्य रूप से केंद्र सरकार के साथ थी।

अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राज्य सरकार को अस्थिर करने के प्रयास में उसके साथ भेदभाव कर रहे हैं, और दावा किया कि राज्य प्रशासन अत्यधिक दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के सभी फंड गुजरात को हस्तांतरित करने की व्यवस्था की जा रही है।

बता दें, प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य के अनुष्ठानिक स्नान को लेकर हुए विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा देने के बाद से ही वह मीडिया की सुर्खियों में हैं। अग्निहोत्री ने टिप्पणी की, “जब मैंने सनातन संस्कृति के प्रतीकों का अपमान होते देखा, तो मैं इसे सहन नहीं कर सका और मैंने अपना इस्तीफा दे दिया।”

SC/ST अधिनियम के खिलाफ Alankar Agnihotri की चेतावनी

29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नए विनियम, 2026 पर रोक लगाने के बाद, बरेली के निलंबित नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव से संबंधित प्रावधानों के संस्थागत दुरुपयोग की निंदा करते हुए चेतावनी दी कि ऐसी प्रथाओं के गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं, यहां तक कि देश में आंतरिक अशांति भी पैदा हो सकती है।

अग्निहोत्री ने कहा कि जाति आधारित भेदभाव को कभी भी संस्थागत उपकरण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और इसे उचित शब्दावली और संवाद तक ही सीमित रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिगत भेदभाव से संबंधित धारा को तेजी से एक स्व-प्रेरित अपराध के रूप में माना जा रहा है, जहां योग्यता की परवाह किए बिना परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है।

अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने कहा, “अगर आपका बेटा पढ़ाई में अच्छा है, तो उस पर आरोप लगाए जाएंगे और उसकी तनख्वाह का दुरुपयोग किया जाएगा। इसी तरह, अगर आपकी बेटी या बहू विश्वविद्यालय में पढ़ती है, तो उस पर आरोप लगाए जाएंगे और उसकी तनख्वाह का दुरुपयोग किया जाएगा। बेटियों और बहुओं को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ेगा।”

उन्होंने आगे दावा किया कि इस तरह की प्रथाएं पूरे समाज को प्रभावित करती हैं और चेतावनी दी कि सामाजिक समूहों के बीच लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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