Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारत के चुनाव आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा पर चुनावों को प्रभावित करने के लिए संवैधानिक संस्थानों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
Arvind Kejriwal का BJP और चुनाव आयोग पर तीखा हमला
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए भाजपा पर चुनाव आयोग को चुनावी धोखे के उपकरण में बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जो वर्तमान में पश्चिम बंगाल में हो रहा है, वैसा ही दिल्ली के पिछले चुनावों में भी हुआ था।
केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग को धोखे से चुनाव जीतने का हथियार बना लिया है। पश्चिम बंगाल में आज जो हो रहा है, वही दिल्ली चुनावों में भी हुआ था। मतदाता सूची से नाम हटा दिए गए, पुलिस प्रशासन ने भाजपा की गुंडागर्दी को खुली छूट दी और पूरा प्रशासन भाजपा की जीत सुनिश्चित करने में लगा हुआ था। लोकतंत्र की नींव ही चकनाचूर हो गई।
आप नेता (Arvind Kejriwal) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि आज ममता दीदी भी लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। इस संघर्ष में हम उनके साथ खड़े हैं।
ममता बनर्जी का पलटवार: “अघोषित आपातकाल” का आरोप
आज सुबह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल को चुनिंदा रूप से निशाना बनाया जा रहा है और 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों को अघोषित आपातकाल करार दिया। (Arvind Kejriwal)
बनर्जी ने दावा किया कि वरिष्ठ अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले प्रशासनिक आवश्यकता के बजाय राजनीतिक हस्तक्षेप को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने जिस तरह से बंगाल को निशाना बनाया है, वह न केवल अभूतपूर्व है, बल्कि बेहद चिंताजनक भी है। चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले ही मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षकों सहित 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से और बिना किसी पूर्व सूचना के पद से हटा दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप है। निष्पक्ष रहने के लिए गठित संस्थानों का व्यवस्थित राजनीतिकरण संविधान पर सीधा हमला है। ऐसे समय में जब एक बेहद त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची (SIR) प्रक्रिया चल रही है और 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, आयोग का आचरण स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण है और राजनीतिक हितों के प्रति एक असहज समर्पण दर्शाता है, जिससे बंगाल के लोगों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की स्पष्ट अवहेलना करते हुए पूरक मतदाता सूचियां अभी तक प्रकाशित नहीं हुई हैं, जिससे नागरिक चिंतित और अनिश्चित हैं। (Arvind Kejriwal)
अधिकारियों के तबादले या राजनीतिक दखल?
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि IB, STF और CID जैसी एजेंसियों के प्रमुख अधिकारियों का राज्य के प्रशासनिक ढांचे को कमजोर करने के लिए चुनिंदा तबादलों के जरिए स्थानांतरण किए जा रहे हैं। इन कदमों के पीछे के इरादे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि भाजपा इतनी बेताब क्यों है? बंगाल और यहां की जनता को इस तरह लगातार निशाना क्यों बनाया जा रहा है? आजादी के 78 साल बाद भी नागरिकों को कतारों में खड़ा करके अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मजबूर करने से उन्हें क्या संतुष्टि मिलती है? (Arvind Kejriwal)
बनर्जी ने आयोग की कार्रवाई में विरोधाभासों की ओर भी इशारा किया और कहा कि जिन अधिकारियों को पद से हटाया गया था, उन्हें बाद में चुनाव पर्यवेक्षक की भूमिका सौंपी गई। उन्होंने सिलीगुड़ी और बिधाननगर जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों में पुलिस नेतृत्व की अस्थायी अनुपस्थिति की आलोचना करते हुए इसे चूक बताया।









