Bangladesh Violence: पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से आ रही तस्वीरें रूह कपा देने वाली हैं। जहाँ कभी इंसानियत की बात होती थी, आज वहाँ ‘हिंदू’ होना ही जैसे सबसे बड़ा अपराध बन गया है। महज 24 घंटों के भीतर दो मासूम हिंदुओं की बेरहमी से हत्या ने यह साफ कर दिया है कि वहाँ अब अल्पसंख्यकों के लिए न कोई कानून बचा है, न कोई हमदर्द। सिर्फ और सिर्फ खौफ का नंगा नाच है।
Bangladesh Violence: ‘पाकिस्तान 2.0’ बनने की ओर बांग्लादेश
ताजा मामला रोंगटे खड़े कर देने वाला है। जहां एक हिंदू को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया क्योंकि वह ‘भीड़’ की नफरत का निशाना बना। उसे तब तक पीटा गया जब तक उसकी सांसें नहीं थम गईं। सोचिए, उस वक्त उस पर क्या गुजरी होगी जब दर्जनों हाथ उसकी जान लेने पर आमादा थे? क्या उसका गुनाह सिर्फ उसकी आस्था थी? 24 घंटे में दो हत्याएं—यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘नरसंहार’ की आहट है। (Bangladesh Violence)
आज दुनिया के सामने एक बड़ा और कड़वा सवाल खड़ा है। जिस बांग्लादेश को कट्टरपंथ से आजादी दिलाने के लिए खून बहाया गया था, क्या वह आज उसी कट्टरपंथ की आग में जलकर ‘पाकिस्तान 2.0’ बनने जा रहा है?
क्या बांग्लादेश की सरकार कट्टरपंथियों के हाथों में है?
आपको बता दें, जिस तेजी से हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, वह संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में वहाँ केवल एक ही ‘जमात’ का वर्चस्व होगा। और अब सवाल यह है कि, क्या बांग्लादेश की कमान अब चुनी हुई सरकारों के हाथ में है या उन कट्टरपंथी ताकतों के हाथ में, जो तालिबानी सोच रखती हैं और अब विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही हाल रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब बांग्लादेश आतंकवाद का नया गढ़ बन जाएगा और वहां की जमीन से सिर्फ बारूद की गंध आएगी। (Bangladesh Violence)
हिंदुओं पर हमलों की बढ़ती लहर
विस्थापित होते परिवार, जलते घर और अपनों के शवों पर विलाप करती महिलाएं… यह आज के बांग्लादेश की हकीकत है। एक पीड़ित परिवार की चीख जैसे पूरे आसमान को चीर रही है— “कल तक जो हमारे पड़ोसी थे, आज वही हमारे खून के प्यासे क्यों हो गए?” हिंदुओं पर बढ़ते ये हमले चीख-चीख कर कह रहे हैं कि बांग्लादेश एक ऐसे अंधेरे रास्ते पर निकल चुका है जहाँ से वापसी नामुमकिन लगती है। (Bangladesh Violence)
अगर हालात न सुधरे, तो वो दिन दूर नहीं जब बांग्लादेश के नक्शे से अल्पसंख्यकों का नामो-निशान मिटा दिया जाएगा और यह मुल्क पूरी तरह आतंकवाद और मजहबी कट्टरता की बेड़ियों में जकड़ा होगा। अब सवाल दुनियां को करना होगा। क्या आप बांग्लादेश को यूं ही सुलघने देंगे और आतंकवाद कि ओर धकेलने देंगे या फिर इस मुहीम का विरोध करेंगे?









