Bangladesh Violence: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। विनोद बंसल ने दावा किया कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत अब तक 300 से अधिक हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की हत्या की जा चुकी है। उन्होंने इसे हिंदुओं की जातीय सफाई का एक माध्यम बताया है।
Bangladesh Violence: ‘मोहम्मद यूनुस सरकार के तहत बढ़ती हिंसा’
विनोद बंसल ने कहा कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है और उनकी हत्या की जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि उनके घर जलाए जा रहे हैं और दुकानें नष्ट की जा रही हैं। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई हिंसक घटनाओं का खुलासा उनके ही एक मानवाधिकार संगठन ने किया है।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट्स के अनुसार, यूनुस सरकार के शासनकाल में 300 से अधिक हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की हत्या की गई। 2025 में 197 घटनाएं हुईं। हिंदू अल्पसंख्यकों को झूठे मामलों में फंसाकर मारा जा रहा है। उनके घर जलाए जा रहे हैं और दुकानें नष्ट की जा रही हैं। यहां तक कि जेल में बंद कैदी भी सुरक्षित नहीं हैं। ढाका की केंद्रीय जेल में कई घटनाएं घटी हैं। (Bangladesh Violence)
अल्पसंख्यक अधिकारों का उल्लंघन
बंसल ने आगे बताया कि उन्होंने एक द्वीट किया और उसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग और ओआईसी को टैग करते हुए पूछा कि क्या इस्लाम इस तरह की हत्याओं की अनुमति देता है। एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। मानवाधिकार संगठन ऐन ओ सालिश केंद्र (ASK) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से अब तक भीड़ हिंसा में 293 लोगों की हत्या हुई है।
अकेले 2025 में ही भीड़ हिंसा में 197 मौतें, हिरासत में 107 मौतें और 38 गैर-न्यायिक हत्याएं दर्ज की गई हैं। अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ा है और पत्रकारों को भी यातनाओं का सामना करना पड़ा है। इनमें भीड़ हिंसा, गैर-न्यायिक हत्याएं, हिरासत में मौतें, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, राजनीतिक हिंसा और हत्याएं, और प्रेस की स्वतंत्रता का दमन शामिल हैं। अफवाहों के आधार पर लोगों को पीटा गया और मार डाला गया।” (Bangladesh Violence)
बांग्लादेश की स्थिति पर दुनिया की चुप्पी
विनोद बंसल ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी हिंदू संगठन, भारत या अल्पसंख्यक अधिकार समूह द्वारा जारी नहीं की गई है, बल्कि बांग्लादेश के ही एक मानवाधिकार संगठन द्वारा जारी की गई है। उन्होंने आगे बताया कि दरअसल, यह महज़ एक रिपोर्ट नहीं है, बल्कि बांग्लादेश सरकार और दुनिया भर के मुस्लिम एवं मानवाधिकार संगठनों के मुँह पर करारा तमाचा है, जिन्होंने इतनी भयावह स्थिति में भी चुप्पी साध रखी है।
इतना ही नहीं, बांग्लादेश पुलिस अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने वालों के खिलाफ आरोपों को कमज़ोर कर रही है और ऐसी घटनाओं को दुर्घटना या निजी विवाद बताकर खारिज कर रही है। ऐसे भी उदाहरण हैं जहाँ हिंदुओं को बाहरी या भारतीय एजेंट के रूप में चित्रित किया गया है। जमात-ए-इस्लामी, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरह, हिंसक व्यक्तियों और आतंकवादियों के लिए ढाल बन गई है। (Bangladesh Violence)
रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले राजबारी के पांगशा उप-जिले के कालीमोहोर संघ के होसेनडांगा गांव में अमृत मंडल नामक एक हिंदू युवक की जबरन वसूली के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने और उसे जलाने की घटना के कुछ दिनों बाद ही मंडल की हत्या हुई।









