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Bareilly: “वे क्या छिपाना चाहते हैं”, सपा प्रतिनिधिमंडल को बरेली जाते समय रोके जाने पर इमरान मसूद ने UP सरकार की आलोचना की

Bareilly

Bareilly: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने शनिवार को हिंसा प्रभावित बरेली का दौरा करने जा रहे समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को रास्ते में रोके जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की।

मसूद ने राज्य सरकार की कार्रवाई के पीछे की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि वे उन्हें क्यों नहीं जाने देना चाहते। मुझे समझ नहीं आ रहा कि वे क्या संदेश देना चाहते हैं, क्या छिपाना चाहते हैं और उन्हें क्यों नहीं जाने दे रहे हैं।

कांग्रेस सांसद की यह टिप्पणी समाजवादी पार्टी के एक सांसद प्रतिनिधिमंडल के बाद आई है, जिसमें मोहिबुल्लाह नदवी, इकरा हसन और हरेंद्र सिंह मलिक शामिल थे, जो पिछले हफ्ते ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद के बाद बरेली जा रहे थे, जिन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस ने गाजीपुर सीमा पर रोक दिया था।

Bareilly: समाजवादी पार्टी ने भाजपा सरकार पर लगाए आरोप

इस बीच समाजवादी पार्टी ने इस कदम को “अलोकतांत्रिक” करार दिया और कहा कि इसका उद्देश्य विपक्ष की आवाज को दबाना है। सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए सपा सांसद इकरा हसन ने उस पर असहमति को दबाने और लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने का आरोप लगाया।

हसन ने कहा कि वे हमें कितनी बार रोकेंगे? हम इस सरकार के आगे नहीं झुकेंगे, यह सरकार असंवैधानिक तरीके से चल रही है। हम उनके आगे कभी नहीं झुकेंगे, वे हमें एक बार, दो बार, 10 बार रोकेंगे, लेकिन हम अपने लोगों के बीच उनका दर्द सुनने और उनका समर्थन करने के लिए जरूर पहुंचेंगे। (Bareilly)

सपा सांसद ने आरोप लगाया कि प्रशासन सत्तारूढ़ दल के दबाव में काम करते हुए नागरिकों और प्रतिनिधियों की स्वतंत्र रूप से घूमने और अपनी बात कहने की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा रहा है। उन्होंने कहा कि जहाँ भी कोई अपने अधिकारों का दावा करता है, यह सरकार उसके साथ ऐसा ही व्यवहार करती है।

लद्दाख उनमें से एक है और बरेली भी। संभल में जो स्थिति थी, जहाँ हमें जाने से रोका गया, वह भी वहाँ के प्रशासन ने सत्ताधारी दल के दबाव में पैदा की थी और अब इसे बरेली में दुष्प्रचार के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है।

“आई लव मुहम्मद” विवाद की शुरुआत

“आई लव मुहम्मद” विवाद हाल ही में उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में चर्चा में आया है, जिसमें कानपुर और बरेली प्रमुख हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर “आई लव मुहम्मद” लिखे बैनर और पोस्टर लगाए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया गया।

साल 2025 में ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद तब शुरू हुआ, जब बारावफात (ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) के एक जुलूस के दौरान उत्तर प्रदेश के कानपुर में ‘आई लव मुहम्मद’ लिखे हुए पोस्टर और बैनर लगाए गए। इस घटना से सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया और यह विवाद देश के कई अन्य राज्यों में भी फैल गया। (Bareilly)

कानपुर में शुरुआत: 4 सितंबर, 2025 को कानपुर के रावतपुर इलाके में बारावफात के जुलूस के दौरान ‘आई लव मुहम्मद’ लिखा हुआ एक लाइटबोर्ड लगाया गया था। कुछ हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई और इसे एक “नई परंपरा” बताकर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया।

कानपुर पुलिस ने शुरू में कहा कि एफआईआर बैनर के खिलाफ नहीं, बल्कि जुलूस के पारंपरिक रास्ते से हटकर टेंट लगाने को लेकर दर्ज की गई थी। हालांकि, 9 सितंबर को इस मामले में 24 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

विरोध प्रदर्शनों का फैलाव: कानपुर के बाद, यह विवाद बरेली, लखनऊ, मुंबई, मेरठ और देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गया। कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा।

बरेली में प्रदर्शन: 26 सितंबर को, इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के नेता मौलाना तौकीर रजा खान द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन के लिए सैकड़ों लोग बरेली की गलियों में इकट्ठा हुए। प्रदर्शन के अचानक रद्द होने से नाराज भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, और बाद में पुलिस ने मौलाना तौकीर रजा समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने 28 सितंबर को बरेली में इंटरनेट सेवाएँ निलंबित कर दीं। (Bareilly)

सोशल मीडिया और प्रति-अभियान: सोशल मीडिया पर ‘आई लव मुहम्मद’ हैशटैग तेजी से ट्रेंड हुआ, जिसके जवाब में हिंदू संगठनों ने ‘#आई लव महादेव’ और ‘#आई लव राम’ जैसे हैशटैग के साथ प्रति-अभियान चलाया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: इस विवाद पर राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि पैगंबर से प्यार जताना कोई अपराध नहीं है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

गिरफ्तारियां: विवाद के अलग-अलग मामलों में कई राज्यों में गिरफ्तारियां हुईं। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोपों में कई लोगों को हिरासत में लिया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी आरोप लगाया गया कि मुस्लिम समुदाय के धार्मिक पोस्टरों को भी नुकसान पहुँचाया गया था। (Bareilly)

यह विवाद एक धार्मिक नारे के सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ, जिसने देश के कई हिस्सों में धार्मिक स्वतंत्रता, सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव पर बहस छेड़ दी।

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