BRICS Presidency: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने ईरान पर हुए अमेरिकी हमलों के संदर्भ में केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की है। उन्होंने भारत सरकार पर आरोप लगाया कि वह पिछले साल 2025 के ब्रिक्स (BRICS) घोषणा-पत्र जैसे कड़े रुख को दोहराने में विफल रही है। रमेश ने कहा कि 2025 के ब्रिक्स बयान में जिस तरह की स्पष्टता दिखाई गई थी, वर्तमान सरकार ने अब वैसा ही बयान जारी करने की न तो इच्छा दिखाई है और न ही साहस।
BRICS Presidency: अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों पर भारत की चुप्पी
2025 का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ब्राजील की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था। इस साल भारत ब्रिक्स की मेजबानी कर रहा है, इसलिए जयराम ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को खुश करने के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता के महत्व को कम कर रहे हैं।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि भारत 2026 में ब्रिक्स+ की अध्यक्षता कर रहा है। लेकिन अब तक, इसने न तो अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों और लक्षित हत्याओं पर, न ही जीसीसी देशों में गैर-सैन्य स्थलों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों पर, और न ही श्रीलंका और भारत के निकट हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना की चौंकाने वाली कार्रवाई पर कोई सामूहिक बयान जारी करने की इच्छा या साहस दिखाया है। (BRICS Presidency)
उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को खुश रखने और बेंजामिन नेतन्याहू के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने की उत्सुकता में, प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स + की अध्यक्षता के महत्व और उसकी प्रतिष्ठा को कम कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट पर ब्रिक्स देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत
इस बीच, सूत्रों के अनुसार, भारत, ब्रिक्स के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में, शेरपा चैनल के माध्यम से पश्चिम एशिया संघर्ष पर सदस्य देशों के बीच चर्चाओं को सुविधाजनक बना रहा है। सूत्रों ने बताया कि स्थिति पर विचार-विमर्श करने के लिए ब्रिक्स शेरपा की आखिरी वर्चुअल बैठक 12 मार्च को आयोजित की गई थी। सूत्रों ने आगे बताया कि भारतीय नेतृत्व चल रही राजनयिक वार्ताओं के तहत क्षेत्र के ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं के साथ भी संपर्क कर रहा है। भारत यह संपर्क जारी रखेगा। (BRICS Presidency)
ईरान में खामेनेई की हत्या के बाद बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ गया। इसके जवाब में ईरान ने कई खाड़ी देशों और इजरायल में इजरायली और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे जलमार्ग में व्यवधान उत्पन्न हुआ और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों तथा वैश्विक आर्थिक स्थिरता प्रभावित हुई। (BRICS Presidency)









