Budget Session 2026-27: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को बजट सत्र 2026-27 के पहले दिन संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को दोहराया। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत पर होने वाले किसी भी हमले का जवाब “मजबूत और निर्णायक” होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी शक्ति का उपयोग बुद्धिमानी और जिम्मेदारी से किया है।
Budget Session 2026-27: राष्ट्रपति मुर्मू का संसद में सुरक्षा पर जोर
लोकसभा कक्ष में दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब शक्ति को बुद्धिमत्ता और उत्तरदायित्व के साथ प्रयोग किया जाता है, तो वह राष्ट्रीय हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सकती है।
श्री गुरु तेग बहादुर की शिक्षाएं
श्री गुरु तेग बहादुर की शिक्षाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हमें सिखाया है ‘भय कहूं को देत नेह नेह भय मानत आन’। इसका अर्थ है कि हमें न तो किसी को डराना चाहिए और न ही किसी से डरना चाहिए। इस निडर मन और भावना के साथ हम देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि शक्ति का प्रयोग उत्तरदायित्व और बुद्धिमत्ता के साथ किया जा सकता है। (Budget Session 2026-27)

ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता का परिचय
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और परिचालन क्षमता देखी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता देखी। अपने संसाधनों से हमारे देश ने आतंकवाद के गढ़ों को नष्ट कर दिया। मेरी सरकार ने यह कड़ा संदेश दिया है कि भारत पर होने वाले सभी हमलों का जवाब मजबूत और निर्णायक होगा। (Budget Session 2026-27)
सिंधु जल संधि का स्थगन
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखना आतंकवाद से निपटने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि देश की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय शक्ति के सभी साधनों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि मिशन सुदर्शन चक्र जैसी पहलों के माध्यम से सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। (Budget Session 2026-27)
माओवादी उग्रवाद पर सफलता
आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर राष्ट्रपति मुर्मू ने माओवादी उग्रवाद के खिलाफ हासिल की गई महत्वपूर्ण सफलताओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां एक समय माओवादी आतंक 126 जिलों को प्रभावित करता था, वहीं अब यह केवल आठ जिलों तक सीमित है, जिनमें से केवल तीन ही गंभीर रूप से प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष माओवादी समूहों से जुड़े लगभग 2,000 लोगों ने आत्मसमर्पण किया, जिससे लाखों नागरिकों के जीवन में शांति और सामान्य स्थिति बहाल हुई। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब हमारे देश से माओवादी आतंक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। (Budget Session 2026-27)
महिला कैडेटों का राष्ट्रीय रक्षा में योगदान
सुरक्षा पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शक्ति को सामाजिक सशक्तिकरण से भी जोड़ा। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से महिला कैडेटों के पहले बैच के उत्तीर्ण होने को एक मील का पत्थर बताया, जो भारत के विकास पथ में ‘नारी शक्ति’ की प्रधानता को सुदृढ़ करता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर जोर दिया कि एक सुरक्षित राष्ट्र को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी होना चाहिए। रवींद्रनाथ टैगोर के दृष्टिकोण को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निरंतर और ठोस कदम उठा रही है, जिसके तहत ‘मेक इन इंडिया’ उत्पाद वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहे हैं। (Budget Session 2026-27)
भारत की संसद का बजट सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और समावेशी विकास पर प्रमुख रूप से चर्चा होने की उम्मीद है।









