Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आए अभी जुम्मा-जुम्मा चार दिन भी नहीं हुए थे कि 7 मई 2026 की रात उत्तर 24 परगना का मध्यग्राम गोलियों की गूँज से दहल उठा। रात करीब 10:30 बजे, जब नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ विधानसभा का काम निपटाकर घर लौट रहे थे, तब एक सुनियोजित हमले में उनकी हत्या कर दी गई। हमलावरों ने जिस प्रोफेशनल तरीके से ‘प्वाइंट ब्लैंक रेंज’ से फायरिंग की, उसने साफ कर दिया कि यह कोई अचानक हुआ झगड़ा नहीं, बल्कि एक टारगेट किलिंग थी।
कौन थे चंद्रनाथ रथ? सिर्फ एक पीए या सुवेंदु के ‘चाणक्य’?
किसी भी राजनीतिक हत्या की गहराई को समझने के लिए मृतक की अहमियत समझना ज़रूरी है। 42 वर्षीय चंद्रनाथ रथ भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी थे। अनुशासन और रणनीतिक समझ उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।
अटूट वफादारी: 2019 में वे सुवेंदु अधिकारी के साथ तब जुड़े जब वे ममता सरकार में मंत्री थे। जब सुवेंदु ने भाजपा जॉइन की, तब चंद्रनाथ भी उनके साथ डटे रहे।
संगठनात्मक पकड़: 2021 के भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम विवाद के दौरान चंद्रनाथ ने जिस तरह से मोर्चा संभाला था, उसने उन्हें सुवेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों की कतार में खड़ा कर दिया था। Chandranath Rath Murder Case
प्रोफेशनल हमला: दहशत फैलाने का संदेश
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने हेलमेट नहीं पहना था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहचान छिपाने की भूल नहीं, बल्कि ‘खौफ पैदा करने का एक जानबूझकर दिया गया संदेश’ था। सिलीगुड़ी नंबर की कार का इस्तेमाल और वारदात के बाद गायब हो जाना यह दर्शाता है कि हत्या की रेकी कई दिनों से की जा रही थी। घटनास्थल पर मिली SUV के टूटे शीशे और खून के धब्बे बंगाल की उस खूनी राजनीति की गवाही दे रहे हैं, जहाँ हार-जीत का फैसला केवल मतपेटियों से नहीं, बल्कि कई बार बंदूकों से भी होता है। Chandranath Rath Murder Case
आरोप-प्रत्यारोप: सिस्टम बनाम सियासत
सुवेंदु अधिकारी ने इसे एक “सुनियोजित साजिश” करार दिया है। भाजपा जहाँ इसे कार्यकर्ताओं और नेताओं के मन में डर पैदा करने की कोशिश बता रही है, वहीं टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। हालांकि, डीजीपी के आंकड़े (200 से ज्यादा FIR और 400 से अधिक गिरफ्तारियां) खुद बताते हैं कि बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा (Post-Poll Violence) एक गहरी और पुरानी बीमारी बन चुकी है। Chandranath Rath Murder Case
‘बाइपोलर’ पॉलिटिक्स का खतरनाक मोड़
बंगाल की राजनीति अब वामपंथ बनाम अन्य से निकलकर पूरी तरह भाजपा बनाम टीएमसी की ‘बाइपोलर’ जंग में तब्दील हो चुकी है। जब राजनीति दो ध्रुवों में बंटती है, तो कैडर के बीच का टकराव अधिक हिंसक और व्यक्तिगत हो जाता है। चंद्रनाथ रथ की हत्या इसी हिंसक संस्कृति का अगला अध्याय है। जब तक चुनावी जीत को व्यक्तिगत दुश्मनी के रूप में देखा जाएगा, तब तक बंगाल की गलियों में लोकतंत्र के साथ-साथ ऐसे ही ‘रणनीतिकारों’ का खून बहता रहेगा। Chandranath Rath Murder Case









