“सड़क पर आपकी एक छोटी सी लापरवाही सिर्फ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि आपके घर के बुझते हुए चिराग की वजह बन सकती है।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक बेहद भावुक पत्र ‘योगी की पाती’ लिखकर कुछ इसी अंदाज में अपनी चिंता व्यक्त की है। प्रदेश की सड़कों पर हर दिन खत्म होती जिंदगियों के आंकड़ों ने सरकार की नींद उड़ा दी है। इस पत्र के जरिए मुख्यमंत्री ने न केवल जनता से सुरक्षा नियमों के पालन की अपील की है, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन बनाने का आह्वान भी किया है। यह पत्र सरकारी आदेश मात्र नहीं है, बल्कि हर उस परिवार के लिए एक चेतावनी है जिसके सदस्य घर से बाहर निकलते समय हेलमेट या सीटबेल्ट को बोझ समझते हैं।

जनवरी 2026 की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘सड़क सुरक्षा’ को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘योगी की पाती’ के माध्यम से प्रदेश के करोड़ों परिवारों को सीधे संबोधित किया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों पर चिंता व्यक्त की है, जिसमें अधिकांश युवा अपनी जान गंवा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पत्र में साफ किया है कि ओवरस्पीडिंग, नशे में ड्राइविंग, और मोबाइल का इस्तेमाल मौत का मुख्य कारण बन रहे हैं।

‘योगी की पाती‘ में सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता
लापरवाही, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी एक परिवार की खुशियां छीन लेता है. 31 जनवरी तक प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह का आयोजन हो रहा है. हमारा लक्ष्य लोगों के सड़क व्यवहार में बदलाव लाना है. उन्होंने आगे लिखा कि सड़क दुर्घटना में होने वाली मृत्यु को शून्य मृत्यु दर लाना हमारा लक्ष्य है।
सीएम योगी के पुलिस और परिवहन विभाग को निर्देश
सरकार ने अब इसे ‘मिशन मोड’ में लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने पुलिस और परिवहन विभाग को स्पष्ट कहा है कि वे केवल चालान काटकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री न करें, बल्कि ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को चिन्हित कर उन्हें ठीक करें। इसके साथ ही, स्कूलों और कॉलेजों में ‘सड़क सुरक्षा क्लब’ बनाने पर जोर दिया गया है ताकि नई पीढ़ी को जागरूक किया जा सके। ‘योगी की पाती’ में विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट और कार चालकों को सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग की याद दिलाई गई है। मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर तक इस संदेश को पहुंचाने का निर्देश दिया है ताकि गांव की पगडंडियों से लेकर शहरों के हाईवे तक सुरक्षा का घेरा मजबूत किया जा सके।

सामूहिक दायित्व और सजगता
उन्होंने लिखा, “सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि देख मुझे अत्यंत दुख होता है। लापरवाही से वाहन चलाने और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण हम हर वर्ष हजारों लोगों को खो देते हैं। ऐसी दुर्घटनाओं में स्वस्थ लोगों की अकाल मृत्यु अपने पीछे शोक-संतप्त परिवार छोड़ जाती है। सामूहिक दायित्व और सजगता से इस स्थिति को बदला जा सकता है।”
31 जनवरी तक चल रहा सड़क सुरक्षा माह
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में 31 जनवरी तक ‘सड़क सुरक्षा माह’ आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान परिवारों और भविष्य की रक्षा के संकल्प के साथ चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के सड़क-व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
नाबालिगों और पैदल यात्रियों को लेकर चेतावनी
मुख्यमंत्री ने माता-पिता से अपील की कि वे नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति न दें। साथ ही वाहन चालकों से पैदल यात्रियों के प्रति संवेदनशील रहने और उनके अधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया।

यातायात नियमों के पालन पर जताया भरोसा
पत्र के अंत में सीएम योगी ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि प्रदेशवासी यातायात नियमों का पालन कर उत्तर प्रदेश की सड़कों को सुगम और सुरक्षित बनाने में सहयोग करेंगे।









