Cyber Crime: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) के साथ समन्वय कर ‘ऑपरेशन चक्र-III’ के तहत नोएडा स्थित एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा। यह नेटवर्क ‘तकनीकी सहायता’ (Technical Support) के नाम पर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता था।
Cyber Crime: 85 लाख डॉलर की धोखाधड़ी
अपराधी खुद को माइक्रोसॉफ्ट या अन्य प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधि बताकर पीड़ितों के कंप्यूटर में वायरस होने का डर दिखाते थे और समस्या ठीक करने के बहाने लाखों डॉलर ऐंठते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट ने लगभग 8,500 से अधिक अमेरिकी नागरिकों से करीब 85 लाख डॉलर (लगभग 71 करोड़ रुपये) की धोखाधड़ी की है।
छह प्रमुख आरोपी गिरफ्तार
ऑपरेशन चक्र के तहत चलाए गए इस अभियान में छह प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 1.88 करोड़ रुपये नकद के साथ-साथ 34 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए, जिनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अपराध से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज शामिल थे। आरोपियों द्वारा नोएडा में चलाए जा रहे एक अवैध कॉल सेंटर को भी बंद कर दिया गया। (Cyber Crime)
अमेरिकी दूतावास की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका-भारत साझेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण है। एक्स पर एक पोस्ट में, दूतावास ने कहा कि FBI के समन्वय से, भारत की CBI ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, जिसने अमेरिकी नागरिकों से 85 लाख अमेरिकी डॉलर की धोखाधड़ी की और अपराधियों को गिरफ्तार करते हुए अवैध आय की एक बड़ी राशि बरामद की।
सीबीआई के अनुसार, एजेंसी ने FBI से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर एक परिष्कृत साइबर-सक्षम वित्तीय अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, जो 2022 से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहा था। 2022 और 2025 के बीच, आरोपियों ने कथित तौर पर ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA), FBI और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (SSA) सहित अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में खुद को पेश किया। (Cyber Crime)
फर्जी पहचान का उपयोग: जालसाजों की रणनीतियाँ और उनके प्रभाव
फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए, उन्होंने पीड़ितों को यह कहकर धमकाया कि उनके सोशल सिक्योरिटी नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग तस्करी के लिए किया गया है। आरोप है कि जालसाजों ने पीड़ितों को बताया कि उनकी संपत्ति फ्रीज कर दी जाएगी और उन पर दबाव डालकर उन्हें क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट और गिरोह द्वारा नियंत्रित विदेशी बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इस तरह, नेटवर्क ने लगभग 85 लाख अमेरिकी डॉलर की हेराफेरी की।
सीबीआई ने कई स्थानों पर चलाया तलाशी अभियान
सीबीआई ने 9 दिसंबर को मामला दर्ज किया और 10 और 11 दिसंबर को दिल्ली, नोएडा और कोलकाता में कई स्थानों पर समन्वित तलाशी अभियान चलाया । छापेमारी के दौरान, अवैध कॉल सेंटर चलाते हुए छह लोगों को रंगे हाथों पकड़ा गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। (Cyber Crime)
बयान के अनुसार, सीबीआई ने 9 दिसंबर 2025 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की। सीबीआई ने दिल्ली, नोएडा और कोलकाता में आरोपियों से जुड़े कई स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया, जिससे पर्याप्त मात्रा में आपत्तिजनक सबूत प्राप्त हुए।
सीबीआई ने बताया कि अपराध से प्राप्त धनराशि को वर्चुअल एसेट्स और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से भेजा जा रहा था। अपराध से प्राप्त अतिरिक्त धनराशि का पता लगाने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों सहित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने के लिए आगे की कार्रवाई जारी है। (Cyber Crime)









