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Cyber Crime: सुप्रीम कोर्ट के फर्जी नोटिस भेजकर लोगों से ठगी, ED ने 100 करोड़ रु. के साइबर फ्रॉड मामले में चार आरोपियों को दबोचा

Cyber Crime

Cyber Crime: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक के कई साइबर अपराध मामलों में की जा रही जांच के सिलसिले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

ये आरोपी विभिन्न साइबर धोखाधड़ी योजनाओं में शामिल थे। इनमें डिजिटल अरेस्ट करना, फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों, जैसे ईडी और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी नोटिस भेजकर लोगों को धमकाना शामिल है।

Cyber Crime: मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी

मकबूल अब्दुल रहमान डॉक्टर, काशिफ मकबूल डॉक्टर, महेश मफतलाल देसाई और ओम राजेंद्र पांड्या को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों को अहमदाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया। अदालत ने इस मामले में आगे की जाँच के लिए उन्हें पाँच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।

ईडी सूरत उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 15 अक्टूबर, 2024 को सूरत पुलिस के विशेष ऑपरेशन समूह द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत शुरू किए गए मामले में अपनी जांच के बाद आरोपी को मकबूल अब्दुल रहमान डॉक्टर और अन्य के खिलाफ गिरफ्तार किया।

फर्जी नोटिस का खेल (Cyber Crime)

इस मामले में, ईडी ने कहा कि मकबूल डॉक्टर, उनके बेटे काशिफ मकबूल डॉक्टर और बासम मकबूल डॉक्टर, महेश देसाई, ओम राजेंद्र पंड्या और अन्य सहयोगियों ने डिजिटल गिरफ्तारी, विदेशी मुद्रा व्यापार जैसे विभिन्न साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से भोले-भाले लोगों को धोखा दिया है और भारत के सर्वोच्च न्यायालय और ईडी जैसी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के फर्जी नोटिस भेजकर निर्दोष व्यक्तियों को धमकाया है।

ईडी की बड़ी कार्रवाई

ईडी ने कहा कि अब तक की गई जांच के अनुसार, आरोपी 100 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध आय (पीओसी) के शोधन में शामिल पाए गए हैं। ईडी ने कहा कि पीओसी को वैध बनाने की अपनी कार्यप्रणाली के तहत आरोपियों ने अपराध की आय को एकत्रित करने और संचय करने के लिए अपने कर्मचारियों, सहयोगियों और किराए के व्यक्तियों के नाम पर बैंक खाते खोले और उनकी व्यवस्था की।

सिम कार्ड से लेकर हवाला ऑपरेटर तक

इसके अलावा, एजेंसी ने बताया कि बैंक खातों के संचालन के लिए आरोपियों ने इसी तरह की कार्यप्रणाली का उपयोग करके पूर्व-सक्रिय सिम कार्ड प्राप्त किए थे।

पीएमएलए के तहत जांच के दौरान, यह भी पाया गया है कि इन आरोपियों ने नियामक जांच से बचने के लिए विभिन्न ‘हवाला ऑपरेटरों’ के माध्यम से नकदी को रूट करके पीओसी को क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) में परिवर्तित करके धन शोधन किया है। (Cyber Crime)


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