पश्चिम बंगाल में I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के दफ्तर पर छापेमारी को लेकर जारी सियासी और कानूनी घमासान में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका दिया है। आज हुई सुनवाई में अदालत ने राज्य पुलिस द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई सभी FIR पर रोक लगा दी है।
जब जांच एजेंसियां और राज्य सरकारें आमने-सामने हों, तो न्यायपालिका की भूमिका निर्णायक हो जाती है। कोलकाता में I-PAC के दफ्तर पर छापेमारी के दौरान जो ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’ शुरू हुआ था, उसने आज देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर एक नया मोड़ ले लिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर “सबूतों की चोरी” और “जांच में बाधा” डालने के ED के सनसनीखेज आरोपों के बीच, सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court)ने साफ कर दिया कि किसी भी राज्य की एजेंसी केंद्रीय जांच में इस तरह दखल नहीं दे सकती। कोर्ट की यह रोक ममता सरकार के लिए एक बड़ी कानूनी हार मानी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी , पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और ईडी की याचिका पर नोटिस जारी किया। जिसमें उन पर राजनीतिक परामर्श लेने वाली कंपनी I-PAC के परिसर और इसके संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर ईडी की छापेमारी के दौरान दखल दिया गया है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने ममता बनर्जी, डीजीपी से सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर भी जवाब देने को कहा। अदालत ने कहा कि ईडी द्वारा दायर याचिकाओं में गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

FIR पर स्टे: जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 4 FIR की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
गंभीर आरोप: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (ED की ओर से) ने आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद दफ्तर में घुस आईं और महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण व दस्तावेज अपने साथ ले गईं। उन्होंने इसे ‘कानून का उल्लंघन’ करार दिया।
CCTV फुटेज: कोर्ट ने बंगाल पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि छापेमारी वाले दिन के सभी CCTV फुटेज और रिकॉर्डिंग्स को सुरक्षित रखा जाए।
राज्य को नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के DGP राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने क्या दलील दी?
ईडी की ओर से पैरवी कर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा, यह घटना बहुत चौंकाने वाला पैटर्न दिखाती है। इससे ऐसे कामों को ही बढ़ावा मिलेगा, केंद्रीय बल हतोत्साहित होंगे। राज्य सरकारों को लगेगा कि वे घुस सकते हैं, चोरी कर सकते हैं, फिर धरने पर बैठ सकते हैं। एक मिसाल कायम की जानी चाहिए; वहां मौजूद अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए। ऐसे सबूत थे जिनसे यह निष्कर्ष निकला कि I-PAC ऑफिस में आपत्तिजनक सामग्री पड़ी थी। हमारी याचिका की सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में वकील और अन्य लोग कलकत्ता HC में घुस गए; ऐसा तब होता है जब लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र ले लेता है।”

अगले कुछ महीनों में (मार्च-अप्रैल 2026) पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC पर हुई यह कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख बंगाल की राजनीति को और गरमाएगा। अब सबकी नजरें 3 फरवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ तय होगा कि क्या इस मामले की जांच CBI को सौंपी जाएगी या नहीं। यह कानूनी लड़ाई अब केवल एक छापे की नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य के अधिकारों के बीच की जंग बन चुकी है।









