Imran Khan: जब बात मैदान की होती है, तो भारत और पाकिस्तान के बीच का मुकाबला जंग से कम नहीं होता। लेकिन जब बात ‘इंसानियत’ और ‘पुराने यार’ की आती है, तो भारत कभी पीछे नहीं हटता। आज विश्व क्रिकेट ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने साबित कर दिया कि खिलाड़ी का सम्मान और उसकी सेहत किसी भी राजनीति से कोसों ऊपर है।
Imran Khan के बेटे की अपील ने दुनिया को झकझोर दिया
कुछ दिनों पहले पाकिस्तान की अडियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 विश्व कप विजेता कप्तान इमरान खान (Imran Khan) के बेटे ने एक दर्दभरी अपील की थी। उन्होंने बताया था कि उनके पिता की तबीयत लगातार बिगड़ रही है।
इमरान खान की आँखों में गंभीर समस्या आ गई है, उन्हें धुंधला दिखाई दे रहा है और वे असहनीय दर्द में हैं। बेटे ने पाकिस्तान के हुक्मरानों से गुहार लगाई थी कि उनके पिता को उचित ‘मेडिकल ट्रीटमेंट’ दिया जाए, लेकिन सत्ता के गलियारों में उस कराह को अनसुना कर दिया गया।

भारत ने निभाया ‘पुराना याराना’
जब पाकिस्तान सरकार ने चुप्पी साधे रखी, तब सरहद पार से भारत ने दोस्ती और इंसानियत का हाथ बढ़ाया। भारत के दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर और कपिल देव समेत दुनिया के 14 पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने एकजुट होकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में किसी राजनीति का जिक्र नहीं है, बल्कि एक खिलाड़ी की दूसरे खिलाड़ी के प्रति संवेदना है। (Imran Khan)
भारतीय कप्तानों का पाकिस्तान को कड़ा संदेश
भारतीय कप्तानों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि, एक महान एथलीट और विश्व स्तर के खिलाड़ी को इस तरह बिना इलाज के तड़पने देना मानवता के खिलाफ है। इमरान खान (Imran Khan) को ‘तुरंत मेडिकल केयर’ दी जाए ताकि उनकी आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य सुरक्षित रहे। खेल हमें जोड़ना सिखाता है, और आज भारत अपने उसी पुराने प्रतिद्वंद्वी और साथी के लिए खड़ा है। (Imran Khan)
क्या राजनीति पर भारी पड़ेगी इंसानियत?
फिलहाल यह पहली बार नहीं है जब भारत ने बड़प्पन दिखाया है। खेल के मैदान पर भले ही हम एक-दूसरे को हराने की कसम खाते हों, लेकिन जब एक खिलाड़ी लाचार होता है, तो भारत की मिट्टी और यहाँ के संस्कार उसे अकेला नहीं छोड़ते। गावस्कर और कपिल देव की इस पहल ने दुनिया को बता दिया है कि “खिलाड़ी कभी पूर्व नहीं होता, और दोस्ती कभी बूढ़ी नहीं होती।” (Imran Khan)
आज पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान सरकार पर टिकी हैं। क्या वे खेल जगत की इस मानवीय अपील को स्वीकार करेंगे? भारत ने अपना फर्ज निभा दिया है, अब बारी पाकिस्तान की है कि वह इंसानियत को राजनीति की भेंट न चढ़ने दे।
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