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India Partition: ‘अगर 1947 में RSS मजबूत होता, तो विभाजन नहीं होता…’ संघ प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर का बड़ा बयान

India Partition

India Partition: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि अगर 1947 में RSS अधिक मजबूत होता, तो देश का विभाजन नहीं होता। उनका मानना है कि देश का विभाजन भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक था।

नागपुर में आयोजित एक संगोष्ठी में आंबेकर ने कहा कि देश का विभाजन सबसे दर्दनाक घटना थी। जब 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, तब संघ उतना मजबूत नहीं था, जितना वह चाहता था या जितना आज है। अगर उस समय RSS मजबूत होता, तो देश का विभाजन कभी नहीं होता। फिर भी, संघ ने हिंदुओं की रक्षा और पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयास किया। विभाजन के कारण, उस समय की व्यवस्था के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश था।

India Partition: RSS के बारे में फैलाई जा रही गलत सूचनाएँ- आंबेकर

आंबेकर ने राजनीतिक लाभ के लिए RSS के बारे में फैलाई जा रही गलत सूचनाओं पर जोर देते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए अक्सर RSS के बारे में तरह-तरह की गलत सूचनाएँ फैलाई जाती हैं। लेकिन वास्तविकता में, RSS न तो किसी से नफरत करता है और न ही किसी को दुश्मन मानता है। RSS सभी को अपना मानता है और समाज के सभी वर्गों के साथ संवाद बनाए रखने में विश्वास रखता है। इसलिए, RSS हमेशा सभी के साथ चर्चा और संवाद के लिए तत्पर है। (India Partition)

RSS का पाकिस्तान के साथ संवाद पर विचार

इसके अलावा, संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबले द्वारा पाकिस्तान के साथ संवाद जारी रखने संबंधी बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में आंबेकर ने कहा कि RSS के दृष्टिकोण को गहराई से समझने की जरूरत है। आरएसएस हमेशा से यह मानता आया है कि लोगों के बीच संवाद और संचार जमीनी स्तर पर और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से समस्याओं को हल करने में सहायक होते हैं। दत्तात्रेय होसबले ने भी यही कहा था।

आंबेकर ने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच सरकार स्तर की वार्ता राजनीतिक और कूटनीतिक मामला है। संघ न तो ऐसे मामलों पर तुरंत किसी को सलाह देता है और न ही उसने कभी ऐसा किया है। हालांकि, यह सच है कि जब आधिकारिक चैनलों के माध्यम से चीजें आगे नहीं बढ़ रही हैं, तो होसबले ने कहा था कि लोगों के बीच जो संवाद अभी भी हो रहे हैं, उन्हें जारी रखना चाहिए। कुछ मुद्दे उठते रहते हैं, और व्यापार भी जारी रहता है। इन्हें बनाए रखना चाहिए ताकि संबंध बरकरार रहें, और धीरे-धीरे कुछ मुद्दे हल हो सकें। (India Partition)

“जय भीम, लाल सलाम” पर टिप्पणी

आजकल कुछ समूहों द्वारा लगाए जा रहे ‘जय भीम, लाल सलाम’ जैसे नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए आंबेकर ने कहा कि जब तक दुनिया में गौतम बुद्ध द्वारा दिखाया गया शांति का मार्ग मौजूद है, तब तक कार्ल मार्क्स या अन्य विचारधाराओं के रास्ते पर चलने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी इसी प्रकार के विचार व्यक्त किए थे और उनके मूल विचारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। 

आंबेकर ने कहा कि दुनिया में चल रहे विभिन्न संघर्षों के कारण भारत भी कुछ क्षेत्रों में चुनौतियों और संकटों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में सभी से सहयोग की अपेक्षा होती है। उन्होंने कहा कि देश को दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशील और संकट की परिस्थितियों में राजनीतिक लाभ-हानि की सोच नहीं लानी चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। (India Partition)

1947 का विभाजन: भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटना

1947 का भारत विभाजन आधुनिक दक्षिण एशियाई इतिहास की सबसे दर्दनाक और युगांतरकारी घटना थी, जिसके तहत ब्रिटिश भारत को विभाजित कर दो स्वतंत्र राष्ट्रों—भारत और पाकिस्तान का निर्माण किया गया। ब्रिटिश संसद द्वारा 18 जुलाई, 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 पारित किया गया, जिसके तहत 14-15 अगस्त 1947 की आधी रात को यह विभाजन प्रभावी हुआ। इसके चलते बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे, अभूतपूर्व विस्थापन और लाखों लोगों की असमय मृत्यु हुई। (India Partition)

विभाजन के मुख्य कारण-

  • अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति: ब्रिटिश शासकों ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक आधार पर दूरियां बढ़ाने के लिए राजनीतिक और सामाजिक विभाजन का सहारा लिया।
  • द्वि-राष्ट्र सिद्धांत (Two-Nation Theory): अखिल भारतीय मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना का मानना था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग राष्ट्र हैं, इसलिए मुसलमानों के लिए एक अलग देश होना चाहिए।
  • सांप्रदायिक दंगे और अविश्वास: 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा बुलाए गए ‘प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस’ (Direct Action Day) के बाद देश भर में भयानक दंगे भड़क उठे, जिससे विभाजन अपरिहार्य हो गया।
  • माउंटबेटन योजना: भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड लुई माउंटबेटन ने देश की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए जून 1947 में विभाजन की योजना को अंतिम रूप दिया। (India Partition)

विभाजन की प्रक्रिया और रेडक्लिफ रेखासीमा का निर्धारण

ब्रिटिश वकील सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में सीमा आयोग ने भारत और पाकिस्तान के बीच भौगोलिक सीमाओं का निर्धारण किया, जिसे ‘रेडक्लिफ रेखा’ कहा जाता है। मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों के आधार पर ब्रिटिश भारत के दो बड़े प्रांतों, पंजाब और बंगाल का विभाजन किया गया। पंजाब का पश्चिमी भाग पाकिस्तान (पश्चिमी पाकिस्तान) और पूर्वी भाग भारत के पास रहा, जबकि बंगाल का पूर्वी हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान (जो 1971 में बांग्लादेश बना) और पश्चिमी हिस्सा पश्चिम बंगाल (भारत) बना। जमीन के साथ-साथ सैन्य संसाधनों, सरकारी खजाने, रेलवे और प्रशासनिक सेवाओं का भी दोनों देशों के बीच अनुपात के आधार पर बंटवारा किया गया। (India Partition)

मानव इतिहास के सबसे बड़े प्रवासन में लगभग 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोगों को रातों-रात अपनी जड़ों से उखड़कर सीमा पार करनी पड़ी। इस दौरान भड़के सांप्रदायिक दंगों में अनुमानतः 2 लाख से 20 लाख लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। लाखों महिलाओं को अगवा किया गया, उनके साथ अमानवीय क्रूरता की गई और अनगिनत परिवार हमेशा के लिए बिखर गए। दोनों देशों में अचानक पहुंचे करोड़ों विस्थापितों के रहने, खाने और पुनर्वास के लिए विशाल शरणार्थी शिविर बनाने पड़े, जिसका आर्थिक बोझ लंबे समय तक रहा। विभाजन के इस गहरे दर्द और बलिदानियों की याद में भारत सरकार हर साल 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाती है।


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