India-US Trade Deal: देश के कृषि क्षेत्र में एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है। भारत और अमेरिका के बीच होने वाले प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade Deal) ने किसान संगठनों के बीच गुस्से की आग सुलगा दी है। 12 फरवरी को देश भर के किसान सड़कों पर उतरकर एक बड़ा प्रदर्शन करने जा रहे हैं।
India-US Trade Deal: क्या खतरे में है करोड़ों दूध उत्पादकों की आजीविका?
ऑल इंडिया किसान सभा का मानना है कि यह समझौता भारतीय खेती के लिए ‘डेथ वारंट’ साबित हो सकता है। जहां किसानों को डर है कि अमेरिका से सस्ते डेयरी उत्पादों के आयात से भारत के करोड़ों दूध उत्पादकों की कमर टूट जाएगी।और अमेरिकी सब्सिडी वाले कृषि उत्पाद भारतीय बाज़ार में आने से स्थानीय फसलों के दाम गिरेंगे। इसलिए विपक्ष और किसान संगठनों ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग करते हुए इसे “कॉरपोरेट के फायदे वाली डील” करार दिया है। (India-US Trade Deal)
यह खबर केवल एक विरोध प्रदर्शन की नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार बनाम स्थानीय आजीविका की एक बड़ी बहस बन चुका है, अब किसान सड़कों पर इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरेंगे और वहां विपक्ष संसद में मोदी सरकार को दबाव के साथ घेरती नज़र आएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई ये समझौता किसानों कि कमर तोड़ने वाला है या देश कि GDP के लिए एक विकसित रोडमैप? (India-US Trade Deal)









