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London Declaration  (AI)! 40 देशों ने एआई सुरक्षा चार्टर पर किए हस्ताक्षर; वरदान या अभिशाप? भविष्य की पूरी तस्वीर।

इतिहास खुद को दोहरा रहा है। जिस तरह दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया ने परमाणु हथियारों को नियंत्रित करने के लिए संधियां की थीं, ठीक उसी तरह आज 40 देशों ने ‘डिजिटल एटम बम’ यानी बेकाबू AI को रोकने के लिए लंदन डिक्लेरेशन (London Decleration) पर हस्ताक्षर किए हैं। सवाल यह है कि क्या ये नियम मशीनों को इंसान का गुलाम बनाए रखेंगे, या हम अनजाने में अपने ही विनाश का चार्टर लिख रहे हैं?

लंदन (London) के ऐतिहासिक लैनकास्टर हाउस में दुनिया के 40 से अधिक शक्तिशाली देशों ने एक सुर में ‘लंदन डिक्लेरेशन’ (London Decleration) पर मुहर लगा दी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बेलगाम रफ्तार को सुरक्षित बनाने के लिए यह वैश्विक घोषणापत्र मानवता के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा दस्तावेज माना जा रहा है।

लंदन में आयोजित ‘वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन’ (Global AI Summit) ने आज इतिहास रच दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की असीमित शक्ति और उससे पैदा होने वाले अस्तित्वगत खतरों के बीच, भारत समेत 40 से अधिक देशों ने एआई सुरक्षा और नैतिकता के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता तय करेगा कि आने वाले समय में एआई मानवता का साथी बनेगा या उसका सबसे बड़ा दुश्मन।

​इस अंतरराष्ट्रीय चार्टर के बाद दुनिया एक नए डिजिटल युग में प्रवेश करने जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि चार्टर के नियमों के तहत विकसित एआई से हमें निम्नलिखित लाभ देखने को मिल सकते हैं:-

1. चिकित्सा में क्रांति: एआई के माध्यम से लाइलाज बीमारियों का सटीक निदान और व्यक्तिगत उपचार संभव होगा।

2. जलवायु परिवर्तन का समाधान: ग्लोबल वार्मिंग और आपदा प्रबंधन के लिए एआई आधारित प्रणालियां पहले से कहीं अधिक सटीक भविष्यवाणी कर सकेंगी।

3. पारदर्शी शासन: सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार को खत्म करने और डेटा सुरक्षा को मजबूत करने में एआई एक अहम भूमिका निभाएगा।

4. नैतिक विकास: चार्टर यह सुनिश्चित करेगा कि एआई का विकास मानवीय मूल्यों, गोपनीयता (Privacy) और निष्पक्षता के साथ हो।

जहाँ एक तरफ उम्मीदें बड़ी हैं, वहीं शिखर सम्मेलन में एआई के ‘डार्क साइड’ यानी अंधेरे पक्ष पर भी गहरी चिंता जताई गई है। बिना नियंत्रण के एआई दुनिया को बहुत सारे मोर्चों पर भारी नुकसान पहुँचा सकता है। देखा जाए तो यह चुनाव और लोकतंत्र के लिए एआई जनित फर्जी वीडियो और खबरें सबसे बड़ा खतरा हैं। चार्टर का मुख्य उद्देश्य इस पर लगाम लगाना है। और ऐसी मशीनें जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के निर्णय ले सकें, युद्ध के स्वरूप को घातक और अनियंत्रित बना सकती हैं। एआई के बढ़ते इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर रोजगार के खत्म होने का डर है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता आ सकती है।

भारत की भूमिक

भारत (India) ने इस समिट में अपनी ‘AI for All’ नीति पर जोर दिया। विदेश मंत्री और तकनीकी विशेषज्ञों ने साफ किया कि सुरक्षा के नाम पर नवाचार (Innovation) को दबाया नहीं जाना चाहिए, बल्कि तकनीक का लाभ विकासशील देशों तक पहुंचना चाहिए।

फिलहाल सम्मेलन में भाग लेने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि “हम एक ऐसी शक्ति के साथ खेल रहे हैं जिसे हमने पूरी तरह समझा नहीं है। यह चार्टर उस शक्ति पर लगाम लगाने की पहली वैश्विक कोशिश है।” लंदन में लिया गया यह संकल्प मानवता के भविष्य की दिशा तय करेगा। यदि हम एआई को नैतिक सीमाओं में बांधने में सफल रहे, तो यह ‘सोने की चिड़िया’ की तरह समृद्धि लाएगा, अन्यथा इसके दुष्परिणाम पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।

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