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Lucknow News: फर्जी पहचान के सहारे लखनऊ में रह रहा था बांग्लादेशी नागरिक, बीकेटी पुलिस ने किया गिरफ्तार

Lucknow News

Lucknow News: बांग्लादेश के मूल निवासी और पूरी तरह से फर्जी पहचान के साथ उत्तर प्रदेश में रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक को लखनऊ पुलिस ने बख्शी का तालाब (बीकेटी) इलाके से गिरफ्तार किया है। यह व्यक्ति शहर में एक ‘क्लिनिक जैसी दुकान’ चलाकर स्थानीय लोगों के बीच घुलमिल गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने एक ओप्पो मोबाइल फोन, कुछ नकदी और एक फर्जी भारतीय पहचान पत्र बरामद किया।

Lucknow News: ‘क्लिनिक जैसी दुकान’ चलाकर स्थानीय लोगों के बीच बनाई पहचान

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किया गया व्यक्ति मूल रूप से बांग्लादेश के नरैल जिले का रहने वाला है और लखनऊ में एक ‘क्लिनिक जैसी दुकान’ चला रहा था। लखनऊ पुलिस ने बताया, ‘बांग्लादेश के बीकेटी पुलिस थाना क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी, अरूप बख्शी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके भारतीय पहचान पत्र और पासपोर्ट प्राप्त कर अवैध रूप से रह रहा था।’

किसान पथ फ्लाईओवर के नीचे से हुई गिरफ्तारी

लखनऊ पुलिस मीडिया सेल के अनुसार, पुलिस ने उसे किसान पथ पर स्थित विपश्यना ध्यान केंद्र फ्लाईओवर के नीचे से गिरफ्तार किया। बीकेटी पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी, धोखाधड़ी और विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ पुलिस ने बताया कि पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी ने भारत में अवैध रूप से रहने और फर्जी दस्तावेज प्राप्त करने की बात कबूल की। (Lucknow News)

आधार और मतदाता पहचान पत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट में उठे सवाल

इसी बीच, सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें केंद्र, राज्यों और भारत निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई कि आधार का उपयोग केवल पहचान के प्रमाण के रूप में किया जाए, न कि नागरिकता, निवास स्थान, पता या जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में। यह याचिका याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की थी। (Lucknow News)

अवैध घुसपैठ और कमजोर सत्यापन तंत्र पर बढ़ी चिंता

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि घुसपैठिए और अवैध अप्रवासी कमजोर सत्यापन तंत्रों के माध्यम से आधार कार्ड प्राप्त कर रहे हैं और उसके बाद आधार को मतदाता पहचान पत्र सहित अन्य पहचान दस्तावेजों को प्राप्त करने के लिए एक आधार दस्तावेज के रूप में उपयोग कर रहे हैं। याचिका में दावा किया गया है कि इससे कल्याणकारी वितरण और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होती है।

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 में जन्म तिथि और निवास के प्रमाण के रूप में आधार का उपयोग आधार अधिनियम की धारा 9, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23 (4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत है और इसलिए, अमान्य और अप्रभावी है। (Lucknow News)

अन्य राहतों के अलावा, याचिका में अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है कि आधार को केवल आधार अधिनियम 2016 की धारा 9 और 22 अगस्त, 2023 की यूआईडीएआई अधिसूचना की भावना के अनुरूप ही पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में फर्जी मेडिकल वीजा नेटवर्क का खुलासा

इससे पहले मार्च में, दिल्ली पुलिस के बाहरी जिले की विदेशी प्रकोष्ठ ने अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की थी। इस विशेष अभियान में, पुलिस ने 10 बांग्लादेशी प्रवासियों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी मेडिकल वीजा व्यवस्था का इस्तेमाल किया था। (Lucknow News)

FRRO और पुलिस की संयुक्त मुहिम से तेज हुआ सत्यापन अभियान

गिरफ्तार किए गए अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ निर्वासन की कार्यवाही विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) द्वारा शुरू की गई थी। बाहरी जिले के विदेशी प्रकोष्ठ ने अपने अधिकार क्षेत्र में अवैध आप्रवासन के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया। इस अभियान के तहत, टीमों ने लगातार सत्यापन अभियान चलाए, महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी जुटाई और वैध भारतीय दस्तावेजों के बिना क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की पहचान की।

इस अभियान के लिए विदेशी प्रकोष्ठ की एक समर्पित टीम का गठन किया गया था। एक विशेष सत्यापन अभियान के दौरान, टीम को कुछ ऐसे विदेशी नागरिकों के बारे में विशिष्ट जानकारी मिली, जिन पर बांग्लादेशी होने का संदेह था और जो अपने वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी क्षेत्र में रह रहे थे। यह भी पता चला कि ये लोग भारत में रहने के लिए वैध दस्तावेज न होने के बावजूद बुल्गारिया के लिए मेडिकल वीजा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे थे। (Lucknow News)


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