प्रयागराज की पावन त्रिवेणी के तट पर आयोजित माघ मेला 2026 Magh Mela 2026) में इस समय भक्ति और वैभव का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। संगम की रेती पर जहाँ हजारों साधु-संत अपनी तपस्या में लीन हैं, वहीं एक ऐसे संत ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जिनका अंदाज किसी ‘राजसी ठाठ’ से कम नहीं है।

“प्रयागराज के माघ मेले में इन दिनों श्रद्धा के साथ-साथ ‘स्वर्ण आभा’ की चर्चा जोरों पर है। संगम तट पर पधारे ‘गोल्डन गूगल बाबा’ (Golden Google Baba) (मनोज सेंगर) अपनी अनोखी जीवनशैली और करोड़ों के सोने के गहनों के कारण आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सिर पर सोने का मुकुट, गले में भारी भरकम सोने की मालाएं और पैरों में 4.5 लाख रुपये की बेशकीमती पादुकाएं—बाबा का यह रूप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ‘गूगल बाबा’ के नाम से मशहूर ये संत केवल अपने नाम की तरह ज्ञान का भंडार ही नहीं रखते, बल्कि उनके खान-पान के बर्तन भी चांदी के बने हैं। आखिर क्या है बाबा के इस सुनहरे अवतार का राज और क्यों इन्हें कहा जाता है गूगल बाबा? आइए जानते हैं इस अद्भुत संगम के किस्से।”

क्या है खासियत गोल्डन गूगल बाबा की
प्रयागराज की संगम रेती पर आस्था का महापर्व माघ मेला लगा हुआ है। साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं के बीच इस बार एक ऐसे बाबा चर्चा में हैं, जिनका भव्य स्वरूप हर किसी को चौंका रहा है। सिर से पांव तक सोने-चांदी से सजे गूगल गोल्डन बाबा इस माघ मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बनकर उभरे हैं।
सादगी और वैराग्य के लिए पहचाने जाने वाले संत समाज के बीच गूगल गोल्डन बाबा का यह अनोखा अंदाज हर किसी की निगाहें अपनी ओर खींच रहा है। बाबा के शरीर पर सिर से लेकर पांव तक करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण हैं। हाथों में भारी कंगन और चेन, उंगलियों में देवी-देवताओं की आकृतियों वाली सोने की अंगूठियां, गले में सोने-चांदी का शंख और रुद्राक्ष की मालाओं में जड़ा सोना—बाबा का हर आभूषण खास है।
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करोड़ों का सोना: कानपुर के रहने वाले मनोज सेंगर, जिन्हें दुनिया ‘गोल्डन गूगल बाबा’ के नाम से जानती है, लगभग 4 से 5 किलो सोना हमेशा अपने शरीर पर धारण करते हैं। इसमें सोने की मोटी जंजीरें, कंगन और एक बड़ा स्वर्ण मुकुट शामिल है।
4.5 लाख की चप्पलें: बाबा के आकर्षण का सबसे बड़ा कारण उनकी चप्पलें हैं। यह चप्पलें विशेष रूप से डिजाइन की गई हैं, जिनकी कीमत करीब 4.5 लाख रुपये बताई जा रही है। इनका ऊपरी हिस्सा नक्काशीदार और वैभवशाली है।
चांदी के बर्तन और रॉयल लाइफस्टाइल: बाबा के शिविर में भोजन भी साधारण बर्तनों में नहीं परोसा जाता। वह शुद्ध चांदी के थाल और कटोरियों का उपयोग करते हैं। उनका कहना है कि यह वैभव उनका नहीं, बल्कि उनके ईष्ट देव का है।

क्यों पड़ा ‘गूगल बाबा’ नाम?: इन्हें ‘गूगल बाबा’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके पास धर्म, ज्योतिष और समसामयिक विषयों का इतना गहरा ज्ञान है कि भक्त कहते हैं, “जो गूगल पर नहीं मिलेगा, वो बाबा बता देंगे।”
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: इतनी भारी मात्रा में सोना पहनने के कारण बाबा की सुरक्षा के लिए उनके निजी अंगरक्षक और मेला पुलिस हमेशा मुस्तैद रहती है।

“माघ मेले की ये रंगीनियां ही इसे दुनिया के अन्य धार्मिक आयोजनों से अलग बनाती हैं। जहाँ एक ओर नागा साधु भस्म लगाकर वैराग्य का संदेश देते हैं, वहीं ‘गोल्डन गूगल बाबा’ जैसे व्यक्तित्व यह दिखाते हैं कि भक्ति और वैभव एक साथ भी अस्तित्व में रह सकते हैं। बाबा को देखने और उनके साथ सेल्फी लेने के लिए युवाओं में भारी क्रेज है। फिलहाल, प्रयागराज की रेती पर बाबा की चमक और उनका ‘गूगल’ जैसा ज्ञान, दोनों ही चर्चा का विषय बने हुए हैं।”









