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Magh Mela 2026: मकर संक्रांति पर इतने लाख श्रद्धालुओं ने किया संगम स्नान; ‘हर-हर गंगे’ से गुंजायमान हुई माघ मेला नगरी!

प्रयागराज की पावन धरती पर आज मकर संक्रांति के अवसर पर भक्ति, शक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे को मात देते हुए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर आस्था की डुबकी लगाई।

“सूरज के उत्तरायण होते ही जब संगम की रेती पर शंखनाद हुआ, तो पूरी त्रिवेणी नगरी आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठी। 14 जनवरी 2026 की भोर होते ही लाखों नर-नारी, साधु-संत और कल्पवासी कड़ाके की ठंड की परवाह किए बिना संगम के शीतल जल में उतर गए। मकर संक्रांति के इस पहले शाही स्नान के साथ ही विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम ‘माघ मेला 2026’ का औपचारिक शंखनाद हो गया है। घाटों पर जलती अगरबत्ती की खुशबू, मंत्रोच्चार की गूंज और श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास ने यह साबित कर दिया कि संगम की रेती पर केवल स्नान नहीं होता, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है। क्या प्रशासन की अभूतपूर्व व्यवस्थाएं इस जनसैलाब की आस्था को सुरक्षित और सुगम बना पाईं

सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़

सुबह-सुबह से ही दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पहुंच रहे हैं। लोग गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति पाना चाहते हैं। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर यहां स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है और हजारों यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है। कल्पवासी और साधु-संत भी इस अवसर पर विशेष रूप से स्नान कर रहे हैं।

सुरक्षा और तकनीक: पहली बार माघ मेले में ‘AI-आधारित क्राउड मैनेजमेंट’ का उपयोग किया जा रहा है। 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन्स के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। एटीएस (ATS) और जल पुलिस के जवान तैनात हैं।

कल्पवास का आरंभ: आज के स्नान के साथ ही लाखों कल्पवासियों का एक महीने का कठिन व्रत शुरू हो गया है। ये श्रद्धालु पूरे एक महीने तक संगम तट पर झोपड़ियों में रहकर संयमित जीवन और त्रिकाल स्नान करेंगे।

प्रशासनिक व्यवस्था: उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 2500 से अधिक विशेष बसें और दर्जनों मेला स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। पूरे मेला क्षेत्र को 7 सेक्टरों में बांटा गया है जहाँ 24 घंटे स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।

दान-पुण्य की महिमा: संगम तट पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने खिचड़ी, तिल-गुड़, कंबल और ऊनी कपड़ों का दान किया। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर त्रिवेणी में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

“प्रयागराज का माघ मेला भारतीय संस्कृति की उस अटूट कड़ी का प्रतीक है जो सदियों से देश को एक सूत्र में पिरोए हुए है। प्रशासन की मुस्तैदी और श्रद्धालुओं के धैर्य ने आज के महापर्व को शांतिपूर्ण और भव्य बना दिया है। जैसे-जैसे सूरज ढल रहा है, दीपदान के साथ संगम की लहरें स्वर्ण आभा से चमक उठी हैं। यह संगम स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के बीच जीवित हमारी प्राचीन विरासत का जीवंत उत्सव है।”

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