सोचिए, एक तरफ केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) छापेमारी कर रही हो और दूसरी तरफ सूबे की मुख्यमंत्री खुद उस घर के अंदर घुस जाएं जहाँ तलाशी चल रही है! आज कोलकाता में कुछ ऐसा ही हुआ। ममता बनर्जी ने न केवल रेड के बीच हस्तक्षेप किया, बल्कि बाहर आकर दहाड़ते हुए पूछा— “जब दिल्ली में बैठे लोग सिर्फ लूट और झूठ की राजनीति करते हैं, तो उन्हें बार-बार बंगाल आने की क्या जरूरत है?” यह सिर्फ एक छापेमारी का विरोध नहीं है, बल्कि 2026 के ‘बैटल ऑफ बंगाल’ का औपचारिक शंखनाद है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने कोलकाता में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के विरोध में मोर्चा खोलते हुए भारतीय जनता पार्टी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है।

आज सुबह से ही ED ने कथित ‘फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले’ के सिलसिले में देश भर में 15 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की, जिसमें कोलकाता स्थित I-PAC का दफ्तर और इसके प्रमुख का घर भी शामिल था।
दीदी का ऑन-स्पॉट एक्शन: ममता बनर्जी खुद I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर पहुँचीं। करीब 20-25 मिनट अंदर रहने के बाद वह एक ‘ग्रीन फोल्डर’ लेकर बाहर निकलीं। उन्होंने दावा किया कि इस फोल्डर में उनकी पार्टी के आगामी चुनाव के उम्मीदवारों की सूची और गोपनीय डेटा है, जिसे ED ‘चोरी’ करने की कोशिश कर रही थी।

“करते लूट, बोलते झूठ”
सीएम ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में सिर्फ लूट मची है और नेता झूठ बोलते हैं। उन्होंने तंज कसा, “अगर आप इतने ही ताकतवर हैं तो लोकतांत्रिक तरीके से लड़ें। मेरी पार्टी के हार्ड डिस्क और डेटा क्यों चुरा रहे हैं? अमित शाह को देश संभालना चाहिए, न कि मेरी पार्टी का डेटा इकट्ठा करना चाहिए।”
वोटर लिस्ट (SIR) पर घमासान
ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाया कि Special Intensive Revision (SIR) के नाम पर बंगाल में 54 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा हैं। उन्होंने इसे ‘वोटों की लूट’ करार दिया।

ममता बनर्जी ने भाजपा को ललकारा
ममता बनर्जी ने भाजपा को चुनौती दी कि वे बंगाल में हार के डर से केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि बंगाल की जनता ‘बाहरी’ लोगों को फिर से सबक सिखाएगी।
टीएमसी टैक्स देती है, हमें दबा नहीं सकते
ममता बनर्जी ने कहा, टीएमसी एक पंजीकृत राजनीतिक दल है, आयकर अदा करती है; केंद्र सरकार हमें धन और बाहुबल के बल पर नहीं दबा सकती। भाजपा लोकतंत्र की हत्यारी है, एसआईआर के जरिए नाम मिटा रही है, राजनीतिक दलों के कार्यालयों पर छापे मार रही है। मैं भाजपा को चुनौती देती हूं कि अगर वे बंगाल जीतना चाहते हैं तो हमसे राजनीतिक रूप से लड़ें। विधानसभा चुनाव तभी होंगे जब टीएमसी को नए सिरे से चुनाव रणनीति बनानी होगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप है कि ईडी ने आई-पीएसी कार्यालय पर छापे के दौरान टीएमसी के डेटा और चुनावी रणनीतियों को अपने सिस्टम में स्थानांतरित किया, जो एक अपराध है।









