उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक पुराना मुहावरा है—”बूथ जीता, तो चुनाव जीता।” लेकिन क्या हो अगर आपके बूथ से आपका ही वोटर गायब हो जाए? यूपी में SIR (Special Intensive Revision) की जो ड्राफ्ट लिस्ट 6 जनवरी 2026 को सामने आई है, उसने बीजेपी के अंदर ‘पैनिक’ की स्थिति पैदा कर दी है। करीब 2.89 करोड़ लोगों के नाम कट जाना मामूली बात नहीं है, और सीएम योगी (CM YOGI) का यह कहना कि “इसमें 90% हमारा वोटर है”,
इस खतरे की गंभीरता को बयां करता है। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण(Special Intensive Revision – SIR) के बाद जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने सूबे की सियासत में खलबली मचा दी है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्रक्रिया में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं को आगाह किया है कि वे इसे कतई हल्के में न लें।

बड़े पैमाने पर नाम कटना
निर्वाचन आयोग (ECI) के अनुसार, यूपी में पहले कुल 15.44 करोड़ मतदाता थे। SIR प्रक्रिया के बाद अब केवल 12.55 करोड़ नाम ही ड्राफ्ट लिस्ट में बचे हैं। यानी सीधे तौर पर 2.89 करोड़ (करीब 18.7%) नाम हटा दिए गए हैं।
लिस्ट से नाम कटने का कारण
- मृतक: 46.23 लाख मतदाता।
- शिफ्टेड/लापता: 2.17 करोड़ (सबसे बड़ा हिस्सा)।
- डुप्लीकेट: 25.47 लाख (एक से ज्यादा जगह नाम)।
शहरी क्षेत्रों में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: हैरान करने वाली बात यह है कि नाम कटने का सबसे ज्यादा असर बीजेपी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले शहरों में दिखा है।
बीजेपी के खेमे में क्यों सबसे ज़्यादा चिंता?
बीजेपी को डर है कि नाम कटने से 2027 के विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत और सीटों पर असर पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर में ही कार्यकर्ताओं से कहा था कि “हटाए जा रहे वोटरों में 85-90% हमारे वोटर्स हैं।” पार्टी अब राज्य के 1.62 लाख बूथों पर फॉर्म-6 बांट रही है। कार्यकर्ता घर-घर जाकर नए मतदाताओं, खासकर 18 साल पूरे कर चुके युवाओं, शादी के बाद पता बदलने वाली महिलाओं और नए बसे लोगों को जोड़ने में जुटे हैं।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद सीएम योगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी से जुड़े सभी पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई। बैठक में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक संगठन के लोग और सांसद तथा विधायक शामिल हुए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने सभी सांसद और विधायकों को निर्देश दिया कि पहली लिस्ट में जिन भी वैध लोगों के वोट कट गए हैं उनको फिर से जुड़वाना है।
MP-MLA के साथ मंत्रियों को भी टारगेट
सीएम योगी ने साफ-साफ कह दिया कि सभी सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में बूथ स्तर तक जाकर इस प्रक्रिया में जुट जाएं और अभियान चलाकर उन लोगों के नाम लिस्ट में शामिल कराएं जो छूट गए हैं. साथ ही उन्होंने अपने सभी मंत्रियों को भी अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर जमीन पर उतरने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

अपात्र वोटर्स को लेकर मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों को कहा कि ड्राफ्ट सूची के आने के बाद अपने प्रभार जिलों की वोटर लिस्ट हासिल करिए और विधानसभा वार जांच करवाएं। किसी भी पात्र वोटर्स का नाम छूटना नहीं चाहिए। फॉर्म भरवाकर नाम जुड़वाया जाए और अपात्र या डुप्लीकेट नामों पर आपत्ति दर्ज कराकर हटवाया भी जाए। सीएम योगी ने का कहना है कि इस मेहनत से लोकतंत्र मजबूत होगा और चुनावी रास्ते सुगम होंगे।

विपक्ष का हमला
अखिलेश यादव और कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और जानबूझकर पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम काटे गए हैं। हालाँकि, डेटा बताता है कि शहरी इलाकों (बीजेपी के गढ़) में ज्यादा नाम कटे हैं।









