कलकत्ता हाई कोर्ट में होने वाली ED बनाम TMC की हाई-वोल्टेज सुनवाई ड्रामे और हंगामे की भेंट चढ़ गई। आई-पैक (I-PAC) दफ्तर पर छापेमारी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगे सबूत मिटाने के आरोपों वाली इस याचिका पर सुनवाई शुरू होने से पहले ही कोर्ट रूम में वकीलों और समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शोर-शराबे और धक्का-मुक्की से नाराज जस्टिस सुव्रा घोष (Justice Suvra Ghosh) ने सुनवाई टाल दी और बेंच छोड़कर बाहर निकल गईं।

“कोलकाता से दिल्ली तक सियासी उबाल के बीच आज कलकत्ता हाई कोर्ट का नजारा किसी चुनावी रैली जैसा नजर आया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और तृणमूल कांग्रेस के बीच की कानूनी लड़ाई उस वक्त बेपटरी हो गई, जब कोर्ट रूम में ‘पैर रखने की जगह’ तक नहीं बची। जस्टिस सुव्रा घोष की बार-बार की चेतावनियों के बावजूद जब वकीलों और भीड़ का शोर कम नहीं हुआ, तो जस्टिस घोष ने सख्त नाराजगी जताते हुए बेंच छोड़ दी और सुनवाई को 14 जनवरी तक के लिए टाल दिया। ED ने ममता बनर्जी पर छापेमारी में बाधा डालने और सबूत ‘छीनने’ का जो संगीन आरोप लगाया है, उस पर कोर्ट की मुहर लगने से पहले ही हंगामे ने न्याय प्रक्रिया को रोक दिया।”
ईडी का आरोप
केंद्रीय एजेंसी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान मौके पर पहुंचकर जांच में बाधा डाली। सीएम अपने साथ पुलिस बल लेकर आईं और वहां से कई महत्वपूर्ण फाइलें, दस्तावेज और लैपटाप जबरन उठा ले गई।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ याचिका दायर की है। टीएमसी का कहना है कि चुनाव से पहले पार्टी की रणनीतियों को चुराने के लिए जानबूझकर यह छापेमारी की गई है। ममता बनर्जी ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है।

जांच एजेंसियों का हो रहा दुरुपयोग
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर लोकतंत्र को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वालों को जेल भेजा जा रहा है, जबकि अपराधियों को आसानी से जमानत मिल रही है। अभिषेक बनर्जी ने इसे भाजपा की नए भारत की सोच बताया।









