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MGNREGA का नाम बदलने पर भड़की कांग्रेस, 17 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का किया ऐलान

MGNREGA

MGNREGA: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलने के कदम के विरोध में 17 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। कांग्रेस ने भाजपा और RSS पर अधिकार-आधारित कल्याण को खत्म करने और इसे केंद्र द्वारा नियंत्रित दान से बदलने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस पार्टी ने अपनी राज्य इकाइयों (प्रदेश कांग्रेस समितियों) को सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का निर्देश दिया है। प्रदर्शनों में महात्मा गांधी के चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे, जो उनके नाम और मूल्यों को मिटाने के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक होंगे और लाखों लाभार्थियों पर नए कानून के संभावित प्रभाव को उजागर करेंगे।

MGNREGA का नाम बदलने पर भाजपा-RSS पर कांग्रेस के आरोप

एक्स पर एक पोस्ट में, आईएनसी के आधिकारिक हैंडल ने लिखा, “गांधीजी की विरासत, श्रमिकों के अधिकारों और संघीय जिम्मेदारी पर यह संयुक्त हमला, अधिकार-आधारित कल्याण को खत्म करने और इसे केंद्र से नियंत्रित दान से बदलने के लिए भाजपा-RSS की एक बड़ी साजिश को उजागर करता है।

इस हमले की गंभीरता को देखते हुए, सभी पीसीसी को निर्देश दिया जाता है कि वे कल, 17 दिसंबर 2025 को सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करें। ये विरोध प्रदर्शन महात्मा गांधी के चित्रों के साथ होने चाहिए, जो उनके नाम और मूल्यों को मिटाने के प्रतिरोध का प्रतीक हों और यह उजागर करें कि नया कानून करोड़ों लाभार्थियों को कैसे प्रभावित करेगा।”

कांग्रेस की रणनीति: सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन की योजना

28 दिसंबर को पार्टी के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में, कांग्रेस पीसीसी को सभी मंडलों और गांवों में कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें गांधीजी के चित्रों को फिर से प्रदर्शित किया जाएगा और श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और काम के अधिकार के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता की पुष्टि की जाएगी। पार्टी ने अपने पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, नागरिक समाज संगठनों, MGNREGA श्रमिकों, लाभार्थियों और आम जनता से इसमें भाग लेने का आग्रह किया है।

कांग्रेस ने × पर पोस्ट किया, “पीसीसी से अनुरोध है कि वे सभी स्तरों पर पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, नागरिक समाज संगठनों, MGNREGA श्रमिकों और लाभार्थियों तथा आम जनता की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करें।

इन कार्यक्रमों में स्पष्ट रूप से यह उजागर होना चाहिए कि BIP सरकार किस प्रकार जन कानून को ध्वस्त कर रही है, ग्रामीण आजीविका को कमजोर कर रही है और गांधीजी के दृष्टिकोण के साथ विश्वासघात कर रही है। यह एक राजनीतिक और नैतिक संघर्ष दोनों है। कांग्रेस पार्टी को एमजीएनरेगा, गांधीजी की विरासत और सबसे गरीब लोगों के लिए न्याय के संवैधानिक वादे की रक्षा के लिए आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए।”

नए विधेयक का उद्देश्य

आज सुबह लोकसभा में विकसित भारत- रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (वीबी-जी राम-जी विधेयक) पेश किया गया। इसका उद्देश्य दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को प्रतिस्थापित करना है।

नए विधेयक में ग्रामीण परिवारों के प्रत्येक सदस्य को मौजूदा 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का वेतनभोगी रोजगार सुनिश्चित किया गया है, बशर्ते परिवार के वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित विकास रणनीति के माध्यम से आय सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ टिकाऊ, उत्पादकता बढ़ाने वाली ग्रामीण संपत्तियों का निर्माण करना है।

कई विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन किया और संसद परिसर के भीतर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास जमा हुए। महात्मा गांधी की तस्वीरें लिए हुए सांसदों ने केंद्र पर ग्रामीण रोजगार योजना का नाम बदलने की आड़ में उसे खत्म करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल सहित वरिष्ठ नेता विरोध प्रदर्शन के दौरान मौजूद थे। (MGNREGA)

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