केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बिहार कांग्रेस ने एक बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा (MNREGA) योजना में किए जा रहे बदलावों और बजट में कथित कटौती के विरोध में कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की घोषणा की है। यह आंदोलन 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक यानी कुल 47 दिनों तक चलेगा।
जहां कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार जानबूझकर मनरेगा को कमजोर कर रही है, जिससे ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पार्टी का कहना है कि डिजिटल हाजिरी और बजट की कमी जैसे नियमों के जरिए गरीबों के हक पर प्रहार किया जा रहा है। फिलहाल इस आंदोलन के जरिए कांग्रेस बिहार के ग्रामीण इलाकों में अपनी खोई हुई जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है। मनरेगा सीधे तौर पर गरीब और पिछड़े वर्ग से जुड़ा मुद्दा है, जिसे उठाकर पार्टी सीधे तौर पर बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को घेरना चाहती है।

आंदोलन के अंतिम दौर में बिहार विधानसभा के घेराव का प्लान है। इसमें राज्यभर से हजारों कार्यकर्ताओं और मनरेगा मजदूरों को पटना लाने की तैयारी है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि यह हाल के वर्षों में बिहार का सबसे बड़ा जन-आंदोलन होगा।
तो वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि “मनरेगा को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। हम खामोश नहीं बैठेंगे। पंचायतों से शुरू हुई यह चिंगारी दिल्ली की कुर्सी तक पहुँचेगी।” अब देखना यह होगा कि यह लड़ाई कहां तक जाती है।
आंदोलन का पूरा रोडमैप
कांग्रेस का यह आंदोलन 10 जनवरी 2026 से औपचारिक रूप से शुरू हो रहा है। इसके मुख्य चरण निम्नलिखित हैं
शुरुआत (10-11 जनवरी): सभी जिला मुख्यालयों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस और 11 जनवरी को महात्मा गांधी या बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमाओं के नीचे एक दिवसीय उपवास।
जनसंपर्क अभियान (12-29 जनवरी): पंचायत स्तर पर ‘चौपाल’ का आयोजन। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा लिखे गए पत्र हर ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक और मनरेगा मजदूर तक पहुंचाए जाएंगे।
शहीद दिवस पर सत्याग्रह (30 जनवरी): महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर ब्लॉक और वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना।
प्रशासनिक घेराव (31 जनवरी – 6 फरवरी): जिला कलेक्टर (DM) कार्यालयों के बाहर ‘मनरेगा बचाओ’ धरना।
विधानसभा घेराव (7-15 फरवरी): बिहार प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व में पटना में विधानसभा और राजभवन का विशाल घेराव। यह इस आंदोलन का सबसे आक्रामक हिस्सा होगा।
महारैली (16-25 फरवरी): आंदोलन का समापन देश के अलग-अलग जोनल क्षेत्रों में चार बड़ी मेगा रैलियों के साथ होगा।









