Operation Cyber Hawk: सीमा पार साइबर अपराध के खिलाफ ‘ऑपरेशन साइबर हॉक‘ के तहत एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए, दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिले ने दिल्ली से मुरादाबाद और बरेली, उत्तर प्रदेश तक संचालित होने वाले एक साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
Operation Cyber Hawk: हाई-टेक नेटवर्क का खुलासा
मंगलवार को मोहम्मद वसीम सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर फर्जी बैंक खातों की सुविधा प्रदान करने और साइबर अपराध की आय को लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है। इससे भारतीय धन को अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में पहुंचाने वाली एक हाई-टेक नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
इस अभियान के तहत 4.7 लाख नकद, 7 बैंक डेबिट कार्ड, 14 मोबाइल फोन और 20 सिम कार्ड जब्त किए गए और 600 से अधिक NRCP शिकायतों से जुड़े 85 फर्जी बैंक खातों का पता लगाया गया। (Operation Cyber Hawk)
जांच के दौरान पता चला कि गिरोह ने Whatsapp, Telegram और SMS फॉरवर्डर APK का इस्तेमाल करके फर्जी खातों को नियंत्रित किया और चीन स्थित ऑपरेटरों को धनराशि भेजी। उन्होंने KuCoin और Binance जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राप्त धनराशि को USDT क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया।
गिरोह का मुख्य आरोपी और उसकी पहचान
तमिलनाडु की सोरना सुंदरी की एक शिकायत से जांच शुरू हुई। उन्होंने 6,000 की धोखाधड़ी की सूचना दी, जिसका पता दिल्ली के मयूर विहार स्थित यस बैंक खाते से चला। जांच करने पर खाताधारक की पहचान मोहम्मद वसीम के रूप में हुई। (Operation Cyber Hawk)
वसीम के बैंकिंग हिस्ट्री की गहन छानबीन से एक बात सामने आई कि वह अकेला ही धोखाधड़ी करने वाला नहीं था। बल्कि एक बड़े नेटवर्क के लिए काम करने वाला एक दलाल था। जांचकर्ताओं को एक्सिस और फेडरल बैंक में उसके नाम से चार और खाते मिले, जो लगभग 40 अन्य साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े थे।
यह गिरोह कॉर्पोरेट स्तर की दक्षता के साथ काम करता था और भारतीय बैंकिंग सुरक्षा को दरकिनार करने के लिए अलग-अलग स्तरों में बंटा हुआ था। वसीम और तोसीन जैसे गुर्गों का ध्यान मामूली शुल्क पर “म्यूल अकाउंट” खोलने पर केंद्रित था- ये बैंक खाते उनके नाम पर या गरीब व्यक्तियों के नाम पर रजिस्टर्ड होते थे। ये खाते चोरी की गई धनराशि के लिए प्रवेश बिंदु का काम करते थे। (Operation Cyber Hawk)
जावेद और रजा कादरी जैसे सहायक सदस्यों ने तकनीकी सेतु का काम किया। वे संचालकों से बात करने के लिए टेलीग्राम और व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते थे। उनका सबसे खतरनाक उपकरण एसएमएस फॉरवर्डर एपीके था।
खाता खोलने के बाद, आरोपी पंजीकृत मोबाइल डिवाइस पर एक APK (जैसे Al-neol.apk) इंस्टॉल कर देते थे। इससे चीन स्थित ऑपरेटरों को सीधे लेनदेन के OTP प्राप्त करने की सुविधा मिल जाती थी, जिससे उन्हें खाताधारक की भागीदारी के बिना ही धनराशि निकालने का पूरा नियंत्रण प्राप्त हो जाता था। (Operation Cyber Hawk)
चीन स्थित संचालकों का नेटवर्क
जांच से पता चला कि इस पूरे गिरोह के सरगना चीन में स्थित हैं। Apay-JS टेलीग्राम चैनल का उपयोग करके, ये संचालक लेन-देन की व्यवस्था संभालते थे। एक बार जब पैसा किसी फर्जी खाते में आ जाता था, तो उसे तुरंत कई अन्य फर्जी खातों के माध्यम से ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि लेन-देन का पता न चल सके और फिर Binance, MetaMask और Bitget जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से उसे USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित कर दिया जाता था। (Operation Cyber Hawk)
गिरफ्तार आरोपियों की सूची
गिरफ्तार किए गए गिरोह के सदस्यों में मोहम्मद वसीम और तोसीन (मुख्य खाताधारक), साबिर, फुरकान और साहिबे आलम (क्रिप्टोकरेंसी रूपांतरण और कमीशन चैनलिंग का काम संभालने वाले), जावेद (ओटीपी बाईपास के लिए एसएमएस फॉरवर्डर एपीके का प्रबंधन करने वाला), रजा कादरी (200 से अधिक एनसीआरपी खातों और चीन स्थित “अपे-जेएस” चैनल से जुड़ा प्रमुख वितरक) और नूर मोहम्मद (81 विशिष्ट शिकायतों से जुड़ा सूत्रधार) शामिल हैं।
FIR संख्या 489/25 (पुलिस पांडव नगर) की जांच जारी है। गिरोह की घरेलू शाखा को तो खत्म कर दिया गया है, लेकिन पुलिस अब अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो-वॉलेट आईडी का पता लगाने और देश भर में और पीड़ितों की पहचान करने के लिए विशेष एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। (Operation Cyber Hawk)









