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चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC पर ED का शिकंजा! छापेमारी मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट में आज होगी सुनवाई…

ED raids on I-PAC

ED raids on I-PAC: भारतीय राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाने वाली मशहूर चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC (Indian Political Action Committee) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

ED की टीमों ने I-PAC के दफ्तरों और इसके निदेशक के आवास पर एक साथ छापेमारी की है। इस छापेमारी के बाद सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि आज ही इस मामले पर कलकत्ता हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। (ED raids on I-PAC)

ED raids on I-PAC: जानें ED की कार्रवाई के पीछे तीन मुख्य कारण…

आपको बताते चलें की, ​I-PAC, जिसकी स्थापना कभी प्रशांत किशोर ने की थी, वर्तमान में भारत के कई राज्यों में प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए चुनावी कैंपेन और डेटा मैनेजमेंट का काम करती है। सूत्रों के मुताबिक, ED की इस कार्रवाई के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:-

  1. विदेशी फंडिंग और FEMA का उल्लंघन: जाँच एजेंसी को संदेह है कि I-PAC को मिलने वाले फंड्स में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों की अनदेखी की गई है। कई ऐसी ट्रांजेक्शन मिली हैं जिनका स्रोत स्पष्ट नहीं है। (ED raids on I-PAC)
  2. शेल कंपनियों का जाल: आरोप है कि चुनावी खर्चों को मैनेज करने के लिए कुछ ऐसी फर्जी (Shell) कंपनियों का सहारा लिया गया, जिनके जरिए पैसों की हेराफेरी (Money Laundering) की गई।
  3. कर चोरी और वित्तीय अनियमितताएं: आयकर विभाग और ED पिछले कुछ समय से I-PAC के वित्तीय ऑडिट पर नजर रख रहे थे। छापेमारी का उद्देश्य डिजिटल सबूत और बैंक खातों के दस्तावेजों को जब्त करना है। (ED raids on I-PAC)

फिलहाल आज की सुनवाई बेहद अहम है क्योंकि, ​I-PAC ने ED की इस कार्रवाई और समन को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताते हुए अदालत में चुनौती दी है। और ​संस्था ने अदालत से राहत (Interim Relief) की मांग की है ताकि उनके चुनावी ऑपरेशंस में बाधा न आए। तो ​वहीं, ED कोर्ट में अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट पेश कर सकती है, जिसमें छापेमारी के दौरान मिले ‘महत्वपूर्ण सबूतों’ का जिक्र हो सकता है।

चूंकि I-PAC वर्तमान में विपक्षी दलों के साथ मिलकर आगामी चुनावों की रणनीति तैयार कर रही है, इसलिए इस छापेमारी को ‘विपक्ष की आवाज दबाने’ की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि जाँच एजेंसियां अपना काम स्वतंत्र रूप से कर रही हैं और कानून सबके लिए बराबर है। (ED raids on I-PAC)

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