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Operation Sindoor Lashkar Commander: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से कांप उठा लश्कर: लश्कर कमांडर हाफिज का ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा कबूलनामा— “अल्लाह ने हमें बचा लिया”नहीं तो…

लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ का यह बयान भारतीय सुरक्षा बलों के उस गुप्त और आक्रामक अभियान की पुष्टि करता है जिसने सीमा पार आतंकी बुनियादी ढांचे को हिला कर रख दिया था।

आतंकवाद की नर्सरी चलाने वाले संगठन लश्कर-ए-तैयबा के भीतर खौफ का वो मंजर आज भी ताजा है, जब भारतीय सुरक्षा बलों ने एक बेहद गोपनीय और घातक ऑपरेशन को अंजाम दिया था। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, लश्कर के शीर्ष कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation SIndoor) उनके लिए किसी कयामत से कम नहीं था। रऊफ के कांपते स्वर और यह स्वीकारोक्ति कि “हमला बहुत बड़ा था, अल्लाह ने हमें बचा लिया,” इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि भारतीय सेना की ‘प्रोएक्टिव रणनीति’ ने सीमा पार बैठे आकाओं के सुरक्षित ठिकानों को श्मशान में बदल दिया था। यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि पाकिस्तान के गहरे तंत्र (Deep State) के भीतर भारत की उस बढ़ती मारक क्षमता का खौफ था, जिसने उनके पूरे नेटवर्क को घुटनों पर ला दिया।

हाफिज ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दिया बयान

रऊफ ने कहा, ‘6-7 मई को जो हुआ, वह जगह अब मस्जिद नहीं रही। आज हम वहां बैठ भी नहीं सकते। वह खत्म हो गया है; वह ढह गया है।’ ये बातें LeT के अंदर से अब तक की सबसे सीधी पुष्टि हैं कि भारत के ऑपरेशन ने अपने तय टारगेट पर हमला किया था।

रऊफ लश्कर का ऑपरेशनल कमांडर रहा है। उसने आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने और उन्हें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी सेना द्वारा स्पॉन्सर किए गए लॉन्चपैड से लॉन्च करने में शामिल था।

इस कबूलनामे का खास महत्व है क्योंकि रऊफ कोई मामूली आदमी नहीं है। उसने पहले हमलों में मारे गए आतंकवादियों की जनाजे की नमाज पढ़ाई थी, जिसकी तस्वीरें उस समय वायरल हो गई थीं। अब, महीनों बाद उसके कबूलनामे से इस बारे में किसी भी तरह के इनकार की आखिरी उम्मीद भी खत्म कर दी है।

भारत ने 6-7 मई को पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर किया था हमला

भारत ने यह ऑपरेशन 6-7 मई 2025 को चलाया गया था। भारत ने यह कार्रवाई अप्रैल 2025 में पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में हुए आतंकी हमले के जवाब के तौर पर की थी। पहलगाम में 26 पर्यटकों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। भारत ने इस जवाबी ऑपरेशन में पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए थे, जिसमें LeT का मुख्यालय मरकज़-ए-तैयबा (मुरिदके) और जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर में ठिकाना शामिल था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन हमलों में LeT और JeM के कई शीर्ष आतंकी मारे गए, जिनमें मुरीदके के प्रमुख मुदस्सर खडियान खास (अबू जंदाल) जैसे आतंकी शामिल थे।

मनोवैज्ञानिक युद्ध

 रऊफ का यह कहना कि “हमें बचा लिया गया,” यह दर्शाता है कि हमला इतना अचानक और भीषण था कि आतंकियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। यह बयान लश्कर के कैडरों के बीच गिरते मनोबल और भारतीय सेना के प्रति बढ़ते डर को उजागर करता है।

 मौजूदा स्थिति

 आज की तारीख तक, भारत ने “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर तकनीकी और सैन्य बढ़त बना ली है। रऊफ जैसे कमांडरों की यह बौखलाहट वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान के दावों की पोल खोलती है कि उसकी जमीन पर आतंकी ढांचे मौजूद नहीं हैं।

हाफिज अब्दुल रऊफ का यह कुबूलनामा न केवल भारतीय खुफिया एजेंसियों की जीत है, बल्कि उन आलोचकों के लिए भी एक कड़ा जवाब है जो भारत की रक्षात्मक कार्रवाई पर सवाल उठाते थे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता यह साफ कर देती है कि नया भारत अब केवल हमले का इंतजार नहीं करता, बल्कि दुश्मन के घर में घुसकर खतरे को जड़ से मिटाने का माद्दा रखता है। जैसे-जैसे सीमा पर तकनीक और निगरानी (Surveillance) मजबूत हो रही है, आतंकियों के पास छिपने के रास्ते कम होते जा रहे हैं। रऊफ का डर महज एक व्यक्ति का डर नहीं है, बल्कि यह उस पूरे इकोसिस्टम की हार है जो दशकों से भारत के खिलाफ छद्म युद्ध (Proxy War) लड़ रहा था।

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