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‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर नया सियासी संग्राम, विपक्ष ने सरकार से मांगा जवाब; कहा- राजनाथ सिंह ने संसद को किया गुमराह

Operation Sindoor

Operation Sindoor: सरकार द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम पहली बार आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक करने और नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर उनके नाम जोड़ने के बाद राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। विपक्षी दलों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद में दिए गए पुराने भाषण को लेकर निशाना साधा है, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन के दौरान किसी भी सैनिक को क्षति न पहुँचने का दावा किया था।

Operation Sindoor: ‘किसी सैनिक को नुकसान नहीं हुआ’… पुराने बयान पर घिरी सरकार

28 जुलाई 2025 को संसद के मानसून सत्र के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए जोर देकर कहा था कि “इस ऑपरेशन में हमारे जांबाज सैनिकों को कोई क्षति नहीं पहुंची है”। इसके ठीक 13 महीने बाद सरकार द्वारा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में आधिकारिक तौर पर छह शहीदों के नाम दर्ज किए गए।

अब विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कई सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि जब छह जवान पहले ही शहीद हो चुके थे, तो रक्षा मंत्री ने संसद के पटल पर खड़े होकर देश से झूठ क्यों बोला? विपक्ष ने आरोप लगाया कि एक साल से अधिक समय तक इन वीरों की शहादत को छिपाकर रखा गया और उनके परिवारों को उचित सम्मान व पारदर्शिता से वंचित रखा गया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने राजनाथ सिंह के पिछले साल के उस भाषण का वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस अभियान में एक भी जवान शहीद नहीं हुआ है। (Operation Sindoor)

सरकार बोली- बयान को गलत तरीके से पेश किया

विपक्ष के हमलों के बीच रक्षा मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा है कि रक्षा मंत्री के संसद में दिए गए भाषण के एक हिस्से को चुनकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, उस समय सोशल मीडिया और मीडिया के कुछ हिस्सों में यह दुष्प्रचार चल रहा था कि भारत के लड़ाकू पायलट मारे गए हैं और लड़ाकू विमान गिराए गए हैं। रक्षा मंत्री का बयान उसी विशिष्ट और भ्रामक कहानी को खारिज करने के लिए था।

सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी सैन्य अभियान के बाद हताहतों की पुष्टि करने, उनके सैन्य रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करने और उन्हें राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दर्ज करने की एक लंबी संस्थागत प्रक्रिया होती है, न कि इसे जानबूझकर छिपाया गया था। (Operation Sindoor)

क्या है पूरा मामला?

28 जुलाई को लोकसभा में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा। 16 घंटे तक चली चर्चा के दौरान बोलते हुए उन्होंने कहा, “अगर आप सवाल पूछना चाहते हैं, तो पूछिए कि क्या इस ऑपरेशन में हमारे किसी बहादुर सैनिक को कोई नुकसान पहुंचा? जवाब है, नहीं, हमारे किसी भी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।”

वहीं, कांग्रेस ने पिछले साल का वीडियो क्लिप शेयर करते हुए कहा, “देश नरेंद्र मोदी को माफ नहीं करेगा।” कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा, “या तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संसद को संबोधित करते समय इस बात से अनभिज्ञ थे कि छह सैनिक पहले ही शहीद हो चुके हैं।

यदि ऐसा है, तो यह मंत्री पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है, जिन्हें अपने मंत्रालय का ही ज्ञान नहीं है। या फिर, उन्हें सच्चाई पता थी और फिर भी उन्होंने संसद को गुमराह करना चुना। यह और भी गंभीर है, क्योंकि यह साबित करता है कि यह सरकार लोकतंत्र के मंदिर में राष्ट्र से झूठ बोल रही है – शपथों समेत। सच्चाई चाहे जो भी हो, कुछ तथ्य अपरिवर्तित रहते हैं।” (Operation Sindoor)

13 महीने बाद सामने आए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के छह शहीद

सरकार ने शुक्रवार को पहली बार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कार्रवाई में शहीद हुए छह भारतीय सैन्य कर्मियों के नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक किए। इन नामों को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की वेबसाइट पर ‘रोल ऑफ ऑनर’ अनुभाग में प्रकाशित किया गया और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित किया गया। यह अभियान के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा झेली गई मौतों की पहली औपचारिक सार्वजनिक स्वीकृति थी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) मई 2025 में चलाया गया था। इस अभियान में वीरगति को प्राप्त हुए छह सैन्यकर्मियों में थलसेना के सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार (मरणोपरांत वीर चक्र), लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवर एम मुरलीनाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (मरणोपरांत वायु सेना पदक) शामिल हैं।

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