नई दिल्ली: Political Funding Report: भारतीय राजनीति में सत्ता के साथ-साथ ‘संसाधनों’ की जंग भी उतनी ही दिलचस्प होती है। चुनाव आयोग को सौंपे गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक बार फिर चंदा जुटाने के मामले में निर्विवाद रूप से शीर्ष पर रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के चंदे के बीच का अंतर अब 12 गुना से भी अधिक हो गया है। आइए समझते हैं इस ‘धन-शक्ति’ के पीछे का पूरा गणित।
चंदे का महा-संग्राम: किसको कितना मिला?
साल 2024-25 में सभी राष्ट्रीय दलों को कुल 11,343 दानदाताओं से 6648.56 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसमें से अकेले भाजपा की हिस्सेदारी 91% से भी ज्यादा है।
| राजनीतिक दल | चंदे की राशि (करोड़ में) | दानदाताओं की संख्या |
| भाजपा | ₹6074.015 | 5,522 |
| कांग्रेस | ₹517.394 | 2,501 |
| AAP | ₹38.106 | 2,554 |
| माकपा (CPIM) | ₹16.957 | 741 |
| NPP | ₹2.091 | 25 |
| बसपा (BSP) | ₹0.00 (शून्य) | – |
मायावती के नेतृत्व वाली बसपा ने लगातार 19वें साल यह घोषित किया है कि उसे 20,000 रुपये से अधिक का एक भी चंदा प्राप्त नहीं हुआ है। Political Funding Report
कॉरपोरेट बनाम व्यक्तिगत दान: कंपनियों का भरोसा कहाँ?
राजनीतिक चंदे का सबसे बड़ा स्रोत आम जनता नहीं, बल्कि बड़े व्यापारिक घराने हैं। आंकड़ों के अनुसार, कुल चंदे का 92.18% हिस्सा कॉरपोरेट सेक्टर से आया है।
- भाजपा का दबदबा: भाजपा को कॉरपोरेट जगत से 5717.16 करोड़ रुपये मिले, जो बाकी सभी राष्ट्रीय दलों के कुल कॉरपोरेट चंदे से 13 गुना ज्यादा है।
- कांग्रेस की स्थिति: कांग्रेस को कॉरपोरेट से 383.86 करोड़ रुपये और व्यक्तिगत दानदाताओं से 132.38 करोड़ रुपये मिले। Political Funding Report
‘प्रूडेंट’ बना सबसे बड़ा दानदाता
चंदा देने वालों की सूची में ‘प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट’ सबसे ऊपर है। इसने अकेले 2413.46 करोड़ रुपये का दान दिया। दिलचस्प बात यह है कि इस ट्रस्ट ने अपनी राशि का बड़ा हिस्सा (करीब 35.90%) भाजपा को दिया, जबकि कांग्रेस को 41.81% और ‘आप’ को 43.08% हिस्सा मिला। टॉप-10 दानदाताओं में सीरम इंस्टीट्यूट, वेदांता और मैक्रोटेक डेवलपर्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं। Political Funding Report
राज्यों का योगदान: दिल्ली और महाराष्ट्र ‘पावर सेंटर’
चंदा देने के मामले में देश की राजधानी दिल्ली नंबर-1 पर रही, जहाँ से ₹2639.48 करोड़ राजनीतिक तिजोरियों में पहुँचे। इसके बाद आर्थिक राजधानी महाराष्ट्र (₹2438.86 करोड़) और फिर गुजरात (₹309.17 करोड़) का नंबर आता है। Political Funding Report
चंदे में भारी उछाल का क्या है संकेत?
वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में इस बार चंदे में 161% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं या राजनीतिक गतिविधियाँ तेज होती हैं, निवेश और चंदे की रफ़्तार भी बढ़ जाती है। भाजपा को मिलने वाली बड़ी राशियां यह भी संकेत देती हैं कि बड़े व्यापारिक घरानों का झुकाव वर्तमान सत्ता के प्रति काफी मजबूत बना हुआ है। Political Funding Report









