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Ruchi Veera Vs S T Hasan: सपा में गुटबाजी की रार ने फिर पकड़ा ज़ोर, सांसद रुचि वीरा और पूर्व सांसदएसटी हसन के बीच की अदावत आई सामने!, जानिए क्या है पूरा मसला

समाजवादी पार्टी (SAPA) के भीतर मचे इस आंतरिक घमासान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। मौजूदा सांसद और पूर्व सांसद के बीच का यह विवाद अब सीधे पार्टी मुखिया के दरबार तक पहुँच गया है।

समाजवादी पार्टी जहाँ एक तरफ बाहर के विरोधियों से लोहा ले रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर ‘अपनों’ के बीच छिड़ा वाक युद्ध अखिलेश यादव की सिरदर्दी बढ़ा रहा है। एक मौजूदा सांसद और पूर्व सांसद के बीच सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर शुरू हुई तू-तू-मैं-मैं ने पार्टी की छवि को दांव पर लगा दिया है। विवाद इतना गहरा गया कि खुद अखिलेश यादव को सामने आकर इसे ‘घोर अनुशासनहीनता’ करार देना पड़ा। यह सिर्फ दो नेताओं की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह समाजवादी कुनबे के भीतर वर्चस्व और टिकट की दावेदारी का वह संघर्ष है जो अब नियंत्रण से बाहर होता दिख रहा है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब क्षेत्र में वर्चस्व को लेकर मौजूदा सांसद और पार्टी के ही एक कद्दावर पूर्व सांसद के बीच तीखी बहस हुई। मामला तब और बिगड़ गया जब दोनों ओर से समर्थकों ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

अखिलेश यादव का कड़ा रुख

सूत्रों के अनुसार, लखनऊ में हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने दोनों पक्षों के प्रति नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “पार्टी से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं है। सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करना अनुशासनहीनता है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

दावत में भाजपा विधायकों को बुलाने पर सवाल

दावत में सांसद रुचि वीरा को आमंत्रित न किया जाना, जबकि भाजपा के दो विधायकों को बुलाया जाना, सपा खेमे में कई सवाल खड़े कर गया। हालांकि पूर्व सांसद कार्ड “मिस” होने की बात कर रहे हैं जबकि सांसद खेमे का कहना है कि पूर्व सांसद का निजी कार्यक्रम था। उन्होंने नहीं बुलाया तो कोई बात नहीं, लेकिन भाजपा के विधायकों को बुलाना सवाल खड़े कर रहा है। इससे यह बात साफ हो गई है कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में सपा का साथ नहीं दिया। कुंदरकी उप चुनाव में भी भाजपा की मदद की है। सांसद खेमे के लोग इसे महज संयोग मानने को तैयार नहीं है।

समाजवादी पार्टी के लिए यह आंतरिक कलह किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। अखिलेश यादव ने ‘अनुशासन’ का डंडा चलाकर यह संदेश तो दे दिया है कि वे अनुशासनहीनता पर कोई समझौता नहीं करेंगे, लेकिन जमीन पर इन दोनों गुटों के बीच की खाई को भरना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या ये नेता अपनी तलवारें म्यान में रखते हैं या यह विवाद पार्टी में किसी बड़ी टूट की आहट साबित होता है।

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