Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले 91.70 के सर्वकालिक निचले स्तर पर जा गिरा। यह गिरावट महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और उनके हालिया अंतरराष्ट्रीय कदमों ने भारतीय बाजारों में हड़कंप मचा दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने विदेशी वस्तुओं पर भारी ‘टैरिफ’ (सीमा शुल्क) लगाकर वैश्विक व्यापार युद्ध छेड़ दिया है। विशेष रूप से भारत और ब्राजील जैसे देशों से आने वाले सामानों पर 50% तक का शुल्क थोप दिया गया है। माना जा रहा है कि, भारत के कपड़ा (Textiles), रत्न-आभूषण (Gems & Jewellery) और आईटी क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। ट्रंप की इन नीतियों ने भारतीय निर्यातकों के मुनाफे को शून्य कर दिया है, जिससे देश में डॉलर की आवक कम हो गई और रुपया कमजोर होता चला गया। (Rupee vs Dollar)

Rupee vs Dollar: भारत के लिए हर चीज होने वाली महंगी
आपको बता दें, रुपये के 91.70 पर पहुँचने का मतलब है कि अब भारत के लिए हर चीज महंगी होने वाली है। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है। रुपया गिरने से पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं। और इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य तेल और विदेश में शिक्षा अब आम आदमी की पहुँच से बाहर होती दिख रही है। ट्रंप की नीतियों से आकर्षित होकर निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अमेरिका ले जा रहे हैं, जिससे शेयर बाजार भी खून के आंसू रो रहा है। (Rupee vs Dollar)
जहाँ पूरी दुनिया आर्थिक अस्थिरता से जूझ रही है, ट्रंप अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ‘तारीफ’ करते नहीं थक रहे। उन्होंने दावा किया है कि उनके फैसलों से अमेरिका में महंगाई काबू में है और डॉलर अब तक के सबसे शक्तिशाली दौर में है। लेकिन उनकी यही ‘मजबूती’ बाकी दुनिया, खासकर भारत जैसे उभरते देशों के लिए ‘आर्थिक सुनामी’ साबित हो रही है।
क्या भारत की अर्थव्यवस्था इतनी कमजोर है कि सात समंदर पार लिए गए फैसले हमारी मुद्रा को इस कदर गिरा सकते हैं? रुपये का 91.70 तक जाना न केवल एक वित्तीय घाटा है, बल्कि हमारी आर्थिक संप्रभुता के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। अब समय आ गया है कि भारत डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए कड़े और साहसी कदम उठाए। (Rupee vs Dollar)









