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महायुद्ध के अंत की आस? जिनेवा में रूस-यूक्रेन के बीच ‘पीस टॉक’ शुरू, शांति की मेज पर अमेरिका, पर सरहद पर अब भी बारूद का साया

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Russia Ukraine Peace Talks: सालों से चल रहे खूनी संघर्ष और दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला देने वाले रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच आज जिनेवा से एक उम्मीद की किरण जागी है। वैश्विक दबाव और शांति की अपीलों के बीच, अमेरिका की सीधी मध्यस्थता और मौजूदगी में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने शांति वार्ता के एक नए और निर्णायक दौर की शुरुआत की है।

Russia Ukraine Peace Talks: अमेरिका खुद एक ‘गारंटर’ के तौर पर मौजूद

इस वार्ता को इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें अमेरिका खुद एक ‘गारंटर’ के तौर पर मौजूद है। जिनेवा के गलियारों में हो रही इस गुप्त बैठक का उद्देश्य युद्धविराम की शर्तों को तय करना और मानवीय गलियारों को सुरक्षित बनाना है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि इस दौर में सहमति बनती है, तो यह सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी।

वैश्विक दबाव: क्या दुनिया रूस को शांत करने में सफल होगी?

जहाँ एक ओर जिनेवा में मेज पर हाथ मिलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के तेवर अब भी सख्त और सतर्क हैं। जेलेंस्की ने विश्व समुदाय को आगाह करते हुए कहा है, खुफिया रिपोर्टों के हवाले से चेतावनी दी है कि रूस शांति वार्ता का इस्तेमाल अपनी सेना को फिर से संगठित करने के लिए कर सकता है। (Russia Ukraine Peace Talks)

उन्होंने दावा किया है कि वार्ता के बीच भी रूस यूक्रेन के ऊर्जा केंद्रों पर बड़े मिसाइल हमलों की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा है कि “हम शांति चाहते हैं, लेकिन कमजोरी की कीमत पर नहीं। बातचीत की मेज पर शब्द मायने रखते हैं, पर सीमा पर रूस के टैंक कुछ और ही कह रहे हैं।”

फिलहाल, रूस की ओर से अभी तक इस वार्ता पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि पुतिन प्रशासन पर भी अब युद्ध खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है। जिनेवा की यह ‘पीस टॉक’ शांति का रास्ता खोलेगी या यह केवल एक और नाकाम कोशिश साबित होगी, यह आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे। दुनिया भर के बाज़ार और आम जनता इस समय केवल एक ही शब्द सुननी चाहती है— ‘युद्धविराम’। (Russia Ukraine Peace Talks)

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