Swami Avimukteshwaranand: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक ऐसा मोर्चा खोल दिया है, जो आने वाले समय में एक बड़े आंदोलन की आहट दे रहा है। स्वामी जी के शब्दों ने आज ‘मर्यादा’ और ‘सत्ता’ के बीच की लकीर को खींच दिया है!
Swami Avimukteshwaranand का योगी पर सीधा प्रहार
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीधे तौर पर सीएम योगी की दोहरी भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘खलीफा’ की संज्ञा दे डाली है। स्वामी जी का दोटूक कहना है कि योगी आदित्यनाथ को या तो मुख्यमंत्री रहना चाहिए या फिर गोरखनाथ मठ का महंत। एक व्यक्ति एक साथ सत्ता की कुर्सी और धर्म की सर्वोच्च गद्दी पर नहीं बैठ सकता। उन्होंने एक गंभीर आरोप लगाते हुए सनसनी फैला दी है कि—”भगवा पहनने वाला व्यक्ति मीट का व्यापार नहीं कर सकता।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भगवा चोला पहनकर ऐसे व्यापारों को संरक्षण या अनुमति दी जा सकती है? (Swami Avimukteshwaranand)

इस बयान ने न केवल बीजेपी समर्थकों बल्कि हिंदू समाज के बीच भी खलबली मचा दी है। यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक धार्मिक आंदोलन की शुरुआत मानी जा रही है। विपक्ष भी इस मौके को भुनाने में लग गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब साधु-संत ही योगी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे? क्या ‘भगवा’ के नाम पर शुरू हुई यह लड़ाई लखनऊ की कुर्सी को अस्थिर कर देगी?
फिलहाल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह हमला सीधे योगी आदित्यनाथ की ‘कोर इमेज’ पर चोट करता है। ‘मीट व्यापार’ और ‘खलीफा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल यह संकेत देता है कि यह लड़ाई अब केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहने वाली। क्या यह देश में एक नए ‘धार्मिक सुधार’ या ‘सत्ता परिवर्तन’ के आंदोलन की नींव है? (Swami Avimukteshwaranand)









