वाशिंगटन डी.सी. से उठी एक सियासी लहर ने आज पूरी दुनिया के पासपोर्ट की ताकत को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी प्रशासन के एक कड़े और चौंकाने वाले फैसले ने एक झटके में 75 देशों के नागरिकों के लिए ‘अमेरिकी सपने’ के दरवाजे बंद कर दिए हैं। इस प्रतिबंधित सूची में पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों का शामिल होना न केवल दक्षिण एशिया के कूटनीतिक समीकरणों को बदल रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नई ‘कोल्ड वॉर’ जैसी स्थिति पैदा कर रहा है। आज जब हजारों छात्र, पर्यटक और व्यापारी हवाई अड्डों पर ठिठक कर रह गए हैं, तब सवाल यह उठता है कि क्या यह सुरक्षा की खातिर उठाया गया कदम है या अमेरिका अपनी नई विदेश नीति के जरिए दुनिया को कोई कड़ा संदेश देना चाहता है? 2026 की इस सबसे बड़ी पाबंदी ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है।

दुनिया की महाशक्ति अमेरिका से आई एक खबर ने वैश्विक राजनीति में भूकंप ला दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कार्यभार संभालते ही अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का ट्रेलर दिखा दिया है। अमेरिका ने 75 देशों के लिए ‘इमिग्रेंट वीजा’ (Immigrant Visa) की प्रोसेसिंग पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है। यह केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि दुनिया के लिए ट्रंप की पहली और सबसे बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।
आपको बताते चलें कि, इस प्रतिबंधित सूची में भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश का नाम शामिल होना सबसे चौंकाने वाला है। इन देशों के हजारों लोग जो अमेरिका में बसने का सपना देख रहे थे, उनके सपनों पर रातों-रात ‘ट्रंप का ताला’ लटक गया है। अब इन 75 देशों के नागरिक अमेरिका की स्थायी नागरिकता (ग्रीन कार्ड की राह) के लिए आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पाएंगे। फिलहाल वैश्विक दूतावासों में अफरा-तफरी का माहौल है और लाखों परिवार अधर में लटक गए हैं।

यदि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो, यह तो बस एक “चेतावनी भरा आगाज़” है। ट्रंप ने इस कदम से साफ कर दिया है कि उनके दूसरे कार्यकाल में घुसपैठ और अप्रवासन (Immigration) को लेकर कोई ढील नहीं दी जाएगी। यह 75 देश तो सिर्फ एक झांकी हैं। जिस तरह से ट्रंप ने ‘बॉर्डर सील’ करने का वादा किया था, उसे देखते हुए यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में H-1B वीजा और वर्क परमिट पर भी बड़ी कैंची चल सकती है।
अमेरिका के इस फैसले ने ‘ग्लोबल विलेज’ की अवधारणा को एक बड़ी चुनौती दी है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए यह न केवल आर्थिक बल्कि एक बड़ी कूटनीतिक हार भी मानी जा रही है। जैसे-जैसे इन देशों की सरकारों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, यह साफ है कि 2026 का यह साल अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वीजा नीतियों के इतिहास में एक ‘ब्लैक ईयर’ के रूप में दर्ज होगा। अब देखना यह है कि प्रभावित देश जवाबी कार्रवाई करते हैं या अमेरिका की शर्तों के आगे झुकने को मजबूर होते हैं।
फिलहाल डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पहली चाल चल दी है। 75 देशों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखाकर उन्होंने साफ कर दिया है कि ‘न्यू अमेरिका’ में नियम अब ट्रंप की शर्तों पर लिखे जाएंगे। यह तो बस पहली चेतावनी है, असली ‘पिक्चर’ अभी बाकी है!









