By-Vaishali
Unnao Rape Case: 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़िता और उनकी माँ ने दिल्ली में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों से मिलकर एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मामले के जांच अधिकारी (IO) ने आरोपी पक्ष को फायदा पहुँचाने और उनकी जीत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक न्यायाधीश के साथ मिलीभगत की थी।
पीड़िता ने बताया कि उसने एक वरिष्ठ अधिकारी से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन उसे बताया गया कि उस दिन छुट्टी है और उसे सोमवार को वापस आना चाहिए। हालांकि, उसने कहा कि एक जूनियर अधिकारी ने उसकी शिकायत स्वीकार कर ली। गंभीर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए, उसने दावा किया कि जांच अधिकारी ने उसके हितों के विरुद्ध काम किया है।
पीड़िता ने कहा कि शिकायत यह है कि जांच अधिकारी ने मेरे साथ अन्याय किया है। उसने न्यायाधीश के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि दूसरा पक्ष जीते, ताकि बलात्कार पीड़िता हार जाए, उसका हौसला टूट जाए और वह आगे मामले को आगे न बढ़ा सके।” (Unnao Rape Case)
Unnao Rape Case: पीड़िता और उसकी माँ का CBI पर अविश्वास
पीड़िता की मां ने बताया कि वे सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मेरी शिकायत मिल गई है। अब देखना यह है कि अधिकारी हमसे कब मिलते हैं। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि सीबीआई इस मामले को संभाल रही है, लेकिन परिवार का भरोसा इस बात पर निर्भर करेगा कि कानूनी कार्यवाही के दौरान एजेंसी उनका साथ देती है या नहीं। पीड़िता की मां ने कहा कि सीबी मौजूद है, लेकिन मैं उन पर तभी भरोसा करूंगी जब वे सुप्रीम कोर्ट में मेरा साथ देंगे।
आज सुबह, उन्नाव बलात्कार पीड़िता और उसकी मां ने शनिवार को CBI के प्रति गहरी पीड़ा और अविश्वास व्यक्त किया, जबकि एजेंसी ने पूर्व उत्तर प्रदेश विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने और उन्हें जमानत देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। (Unnao Rape Case)
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पीड़िता की मां ने सीबीआई के इरादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि भरोसा तभी कायम होगा जब उनसे सीधे तौर पर बातचीत की जाएगी। उन्होंने बताया, “अगर सीबीआई हमसे मिलती है, तभी हम उन पर भरोसा करेंगे। वरना हम उन पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? हमने सीबीआई के बारे में कोई बात नहीं की है। हमने सिर्फ इतना कहा है कि जांच अधिकारी हमसे मिले थे। वे कुलदीप सेंगर की बेटी से बात कर रहे थे। जब हमने उनसे पूछा कि क्या वे पीड़िता को जानते हैं, तो उन्होंने कहा मैं उसे क्यों जानूंगा? उन्होंने यह बात भरी अदालत में कही।”
पीड़िता ने सीबीआई पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि मामले के महत्वपूर्ण चरणों में सीबीआई ने उसका साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा, “अगर सीबीआई मेरे वकील के साथ खड़ी होती, तो हमें यह दिन नहीं देखना पड़ता। हम जीत जाते और वे हार जाते।” (Unnao Rape Case)
पीड़िता के परिवार पर पड़ने वाला प्रभाव
इस घटना के अपने परिवार पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन करते हुए पीड़िता ने कहा, “उनका परिवार तो खुशी से पटाखे फोड़ रहा है। लेकिन मेरे परिवार से पूछिए। मेरे पिता की हत्या कर दी गई। मुझे और मेरे पति को नौकरी से निकाल दिया गया। हम क्या खाएंगे? हम कहाँ जाएँगे? मेरे दो नवजात बच्चे हैं।”
पीड़िता ने धमकाने और अन्याय का भी आरोप लगाया और दावा किया कि जहां उसके परिवार को कष्ट सहना पड़ा, वहीं आरोपी को नरमी बरती गई। उसने न्यायपालिका के खिलाफ तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि यह अन्याय है कि एक परिवार को धमकाया गया जबकि दूसरे को बरी कर दिया गया। (Unnao Rape Case)
इससे पहले शुक्रवार को, सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर दिल्ली उच्च न्यायालय के 23 दिसंबर, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें अपील लंबित रहने तक सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया गया था और उसे जमानत दे दी गई थी।
सेंगर को दिसंबर 2019 में उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी ठहराया गया था और उसे आजीवन कारावास के साथ 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। हालांकि इस मामले में उसे जमानत मिल गई है, लेकिन वह जेल में ही रहेगा क्योंकि वह हत्या से संबंधित सीबीआई के एक अन्य मामले में 10 साल की सजा काट रहा है।उच्च न्यायालय के इस फैसले की पीड़ित परिवार और विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है, जिससे सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप का दबाव और बढ़ गया है। (Unnao Rape Case)









