UP Government Jobs: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के युवाओं को सरकारी नौकरियों में बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला किया है। राज्य सरकार ने सरकारी विभागों में सीधी भर्ती के तहत चयनित होने वाले अभ्यर्थियों के चरित्र और अतीत का रिकार्ड सत्यापन को लेकर एक नई भर्ती नीति को मंजूरी दे दी है।
लखनऊ में प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा घोषित इस नई नीति का मकसद चयन प्रक्रिया में लगने वाले अनावश्यक समय को कम करना और पात्र उम्मीदवारों को जल्द से जल्द रोजगार के अवसर प्रदान करना है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब युवाओं को नियुक्ति पत्र के लिए महीनों तक पुलिस और खुफिया विभाग (LIU) की रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
UP Government Jobs: चरित्र सत्यापन से पहले प्रोविजनल जॉइनिंग- युवाओं को बड़ी राहत
पुरानी व्यवस्था के तहत, अंतिम परीक्षा परिणाम और दस्तावेज सत्यापन पूरा होने के बावजूद, जब तक संबंधित अभ्यर्थी की पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट नहीं आ जाती थी, तब तक विभाग उन्हें नियुक्ति पत्र जारी नहीं करते थे। इस प्रक्रिया में अक्सर महीनों का समय लग जाता था, जिससे युवाओं का मानसिक और आर्थिक नुकसान होता था। अब सामान्य पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट लंबित रहने मात्र से रोका नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें प्रोविजनल नियुक्ति पत्र देकर सेवा में शामिल कर लिया जाएगा।
जिला पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) को अब किसी भी हाल में अनुरोध मिलने के 30 दिनों के भीतर अपनी सत्यापन रिपोर्ट सौंपनी होगी। यदि यह समय सीमा चूकती है, तो गृह विभाग सीधे मामले की निगरानी करेगा। नए नियमों के मुताबिक, पुलिस या LIU कर्मियों को सत्यापन के लिए न तो अभ्यर्थी के घर जाने की जरूरत होगी और न ही उम्मीदवार को थाने या दफ्तर में शारीरिक रूप से उपस्थित होने के लिए मजबूर किया जाएगा। (UP Government Jobs)
किन संस्थानों पर लागू होगी यह नीति?
प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा बुधवार को जारी आदेश के अनुसार, यह नई नीति तत्काल प्रभाव से राज्य के सभी सरकारी विभागों, सरकारी निगमों, परिषदों एवं उपक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों में होने वाली सभी सीधी भर्तियों पर लागू होगी। हालांकि, जो अभ्यर्थी पहले से किसी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं और उनका चयन किसी नई नौकरी के लिए हुआ है, उन्हें दोबारा चरित्र सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे अभ्यर्थियों के संबंध में आवश्यक जानकारी उनके पूर्व विभाग से ही प्राप्त कर ली जाएगी।
सुरक्षा से समझौता नहीं- संवेदनशील पदों और गंभीर अपराधियों के लिए सख्त नियम
एक तरफ जहां सरकार ने आम युवाओं के लिए प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया है, वहीं दूसरी तरफ राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है। सुरक्षा, खुफिया और अन्य बेहद संवेदनशील पदों पर नियुक्ति से पहले विस्तृत और गहन जांच अनिवार्य होगी। इन पदों पर प्रोविजनल जॉइनिंग का लाभ नहीं मिलेगा। हत्या, बलात्कार, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, साइबर अपराध और पेपर लीक या सॉल्वर गैंग जैसे संगीन मामलों में दोषी पाए गए या गंभीर कानूनी स्थिति वाले अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए पूरी तरह से अयोग्य माने जाएंगे। (UP Government Jobs)
हिंसा या उग्रवाद के जरिए स्थापित लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदलने का प्रयास करने वाले संगठनों के सक्रिय सदस्यों को सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी। यदि कोई उम्मीदवार जांच की तारीख से पिछले 3 वर्षों के भीतर ऐसी हिंसक गतिविधियों या आंदोलनों में सक्रिय रहा है, तो उसे अयोग्य माना जा सकता है।
निष्पक्षता का संतुलन- केवल FIR होने से नहीं कटेगा पत्ता
इलाहाबाद हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस नीति में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने का फैसला किया है। सरकार ने साफ किया है कि केवल किसी अभ्यर्थी के खिलाफ FIR दर्ज होने या जांच लंबित होने मात्र से उसे स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ कोई प्रतिकूल पुलिस रिपोर्ट आती भी है, तो जिलाधिकारी (DM) को उस अभ्यर्थी को ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देना होगा, उसके बाद ही कोई आखिरी सिफारिश आगे भेजी जाएगी।
यदि किसी अभ्यर्थी ने स्वघोषणा पत्र में अपने आपराधिक इतिहास या किसी अन्य महत्वपूर्ण तथ्य को छुपाया या गलत जानकारी दी, तो उसकी नियुक्ति तत्काल रद्द कर दी जाएगी और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। (UP Government Jobs)
उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई भर्ती नीति राज्य के प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह नीति “ईज ऑफ लिविंग” और युवाओं को त्वरित रोजगार देने के संकल्प को पूरा करती है। जहां एक तरफ कानून का पालन करने वाले आम अभ्यर्थियों को बिना किसी अड़चन के तेजी से प्रोविजनल जॉइनिंग मिल सकेगी, वहीं दूसरी तरफ अराजक तत्वों, पेपर लीक माफियाओं और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए सरकारी तंत्र के दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।









