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UP Politics: “SIR के जरिए वोटर के नाम हटाने की साजिश”, अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

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UP Politics: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया के माध्यम से मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने आगे आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर के जरिए 3 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए जाएंगे। भाजपा और चुनाव आयोग उन क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रच रहे हैं, जहां भाजपा चुनाव हार गई थी। SIR के जरिए NRC लागू किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी प्रमुख की ये टिप्पणियां राज्य में मतदाता सूची संशोधन और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर बढ़ती राजनीतिक बहसों के बीच आई हैं।

इससे पहले, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में आयोजित विशेष चर्चा के दौरान भाजपा पर तीखा हमला करते हुए सत्ताधारी पार्टी पर हर चीज पर अपना अधिकार जमाने और राजनीतिक लाभ के लिए उसे अपना बनाने का आरोप लगाया था। (UP Politics)

UP Politics: स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम की ऐतिहासिक भूमिका

यादव ने कहा कि इस गीत की विरासत आज प्रचारित की जा रही राजनीतिक कहानियों से कहीं अधिक व्यापक है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम और भारत की जनता का गीत है, न कि किसी राजनीतिक दल का। उन्होंने कहा कि आज सत्ताधारी दल के लोग हर चीज पर अपना दावा करना चाहते हैं।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका को याद करते हुए यादव ने बताया कि कैसे वंदे मातरम ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक सशक्त नारा बन गया और लाखों लोगों को ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा इस गीत के गायन का उदाहरण दिया, जिसने इसे आम लोगों तक पहुँचाने और स्वतंत्रता आंदोलन में अपना स्थान मजबूत करने में मदद की। (UP Politics)

अखिलेश यादव की तीखी आलोचना

सपा नेता ने सदन को याद दिलाया कि ब्रिटिश सरकार ने 1905 से 1908 के बीच इस गीत पर प्रतिबंध लगा दिया था और बंगाल में स्कूली बच्चों को कक्षाओं में इसे गाने के लिए जेल भी भेज दिया था। उन्होंने आगे कहा कि लेकिन क्रांतिकारियों ने इस प्रतिबंध को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने इस गीत को अपने दिलों और दिमाग में जीवित रखा और जनता के बीच आंदोलन को आगे बढ़ाते रहे।

अखिलेश ने तर्क दिया कि वंदे मातरम केवल गाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों को देखिए और समझिए कि भाजपा ने वास्तव में इसे कितना जिया है। आज विभाजनकारी ताकतें इस देश को तोड़ना चाहती हैं। इन्हीं लोगों ने पहले देश के साथ विश्वासघात किया था और अब भी कर रहे हैं। (UP Politics)

यादव ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जो अब राष्ट्रवाद की ज़ोर-शोर से बात करते हैं, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों के लिए मुखबिर का काम किया था। यादव ने आगे कहा कि जो लोग स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल नहीं हुए, उन्हें वंदे मातरम मनाने के बारे में क्या पता होगा? अखिलेश यादव ने भाजपा के ऐतिहासिक दावों को चुनौती देते हुए कहा कि उनका इतिहास बताएगा कि उन्होंने आजादी से पहले यह गीत कभी क्यों नहीं गाया और आजादी के बाद भी क्यों नहीं गाया।

18वीं लोकसभा का छठा सत्र और राज्यसभा का 269वां सत्र सोमवार, 1 दिसंबर को शुरू हुआ, जो संसद के शीतकालीन सत्र का प्रारंभ है। यह सत्र 19 दिसंबर को समाप्त होगा। (UP Politics)

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